हरिद्वार। मेला अस्पताल के मनोचिकित्सक डाॅ. राजीव रंजन तिवारी ने कहा कि तनाव मुक्त रहने के लिए बच्चे सामान्य ज्ञान बढ़ाएं। वे दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने की बजाए खुद से करें। शिक्षा को मनोरंजन के रूप में लेकर चलें। इससे तनाव मुक्त शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।
अमर उजाला की ओर से सोमवार को सरस्वती विद्या मंदिर भेल हरिद्वार में तनाव मुक्त शिक्षा विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों को मानसिक तनाव दूर करने के टिप्स दिए गए। मनोचिकित्सक डाॅ. राजीव रंजन तिवारी ने कहा कि जब हम डिमांड के हिसाब से कार्य नहीं कर पाते हैं तो तनाव में चले जाते हैं, जबकि जो कुछ किया है, उसके बारे में सोचकर आगे बढ़ना चाहिए। कहा कि बच्चों को नकारात्मक कभी भी नहीं सोचना चाहिए। केवल सकारात्मक सोचकर जीवन में कार्य करें।
कहा कि अभिभावक और अध्यापकों को भी बच्चों के भाव देखने चाहिए। अगर वो मानसिक रूप से तनाव में दिखें तो उन्हें इससे बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने अध्यापकों से भी तनाव मुक्त शिक्षा देने पर जोर दिया।
मनोवैज्ञानिक डाॅ. दीपेश चंद्र प्रसाद ने कहा कि कोरोना काल के बाद ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम से मानसिक तनाव में काफी बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि, बच्चों का वो समय भी ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम में चला गया है, जिसमें बच्चे मानसिक रूप से फ्री रहते थे।
कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया और मोबाइल को उतना ही प्रयोग करें, जितना जरूरी है। क्योंकि, मोबाइल आज के समय में तनाव बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव को बढ़ाने में बच्चों का खानपान भी वजह बन रहा है। फास्ट फूड का अधिक प्रयोग करने से मानसिक तनाव में फंस रहे हैं, इसलिए, वो शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें।
इस दौरान बालिका तनुजा ने पूछा कि बच्चे टाइम मैनेजमेंट कैसे करें। छात्रा के सवाल पर मनोवैज्ञानिक ने साफ तौर पर कहा कि जैसा भी उन्हें अच्छा लगता है, उस ढंग से टाइम मैनेजमेंट करें, लेकिन जीवन में सफल होने के लिए अपनी दैनिक दिनचर्या जरूर बनाएं। इस मौके पर प्रधानाचार्य अजय कुमार सिंह, पिंकी प्रसाद आदि मौजूद रहे।