द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिशिक्त किए गए भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद के समर्थन में आए जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद और सुमेरु पीठ के जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद ने एक मंच पर आकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तीनों ने पहले भूमा निकेतन में बैठक की और इसके बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी स्वरूपानंद पर गंभीर आरोप लगाए। नरेंद्रानंद महाराज ने तो स्वामी स्वरूपानंद से सीधे शास्त्रार्थ की बात भी कही।
्र
पत्रकारों से वार्ता करते हुए तीनों जगद्गुरुओं ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का यह कहना कि एक ही संत चार पीठों पर भी शंकराचार्य बन सकता है पूरी तरह गलत है। स्वामी नरेंद्रानंद ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने हैदराबाद में एक ईसाई धर्मगुरु से आशीर्वाद भी लिया था। ऐसे में वह संन्यासी कहां रह गए हैं। वहीं अच्युतानंद तीर्थ ने शंकराचार्य के रूप में अपने चयन को सही बताते हुए कहा कि स्वामी स्वरूपानंद की ओर से उनके खिलाफ जो मुकदमा दर्ज कराया गया है, वह गलत है। यदि स्वरूपानंद सरस्वती को कोई बात करनी भी थी तो उन्हें बुलाते। अच्युतानंद तीर्थ का कहना था कि द्वारिका पीठ पर कोई शंकराचार्य नहीं था, यह पीठ खाली थी और यह पीठ तीर्थ संप्रदाय की है।
इसलिए इस पीठ पर उनको विधिवत शंकराचार्य बनाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद के दो पीठों पर आसीन होने के कारण श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने आपत्ति उठाई थी और मुझे शंकराचार्य बनाने के लिए कहा था। तीनों जगद्गुरुओं ने स्वामी स्वरूपानंद पर हर जगह विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। कहा कि उन्होंने कभी भी कोर्ट में मुकदमा नहीं किया, मगर स्वामी स्वरूपानंद ने हर जगह मुकदमे किए और हर जगह हार भी जाते हैं।
-
तीनों से एक साथ शास्त्रार्थ करने को तैयार हूं : शंकराचार्य
द्वारिका शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने को शंकराचार्य बताने वाले तीनों संतों को एक साथ शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि वे उन्हे शास्त्रार्थ में हरा देंगे तो वे पीठ छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य बनने पर उनकी पीठ के दोनों राज्य की सरकारें सम्मान देती हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए आदि शंकराचार्य के द्वारा बनाई गई चारों पीठों के अलावा अन्य कोई पीठ नहीं है और दो पीठों पर उनके अलावा कोई शंकराचार्य नहीं।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कुछ लोग उनकी उम्र बढ़ने पर अंगुली उठा रहे हैं तो मैं उन लोगों के साथ अपने को शंकराचार्य बताने वालों के साथ शास्त्रार्थ करने के लिए चुनौती देता हूं। इसके अलावा जिस दिन मुझेे ऐसा लगेगा कि उम्र बढ़ने से उनपर पर कोई प्रभाव है तो वे उस दिन दोनों पीठ को छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ लोग उनपर कांग्रेेसी मानसिकता होने का आरोप लगाते है तो यह बताए कि गुजरात में स्थित द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य होने के नाते तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका मानदेय 15 हजार रुपये देना सुनिश्चित कराया, जोकि आज भी मिलता है। उन्होंने कहा कि जो अपने आप को शंकराचार्य बताते हैं वे बताएं कि किस राज्य में उनका सरकार ने आतिथ्य कराया। जबकि उत्तराखंड में उन्हें राज्य अतिथि घोषित करते हुए सुविधाएं प्रदान की हुई हैं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई लड़ने से लेकर गोहत्या बंद कराने के लिए आंदोलन, रामसेतु को तोड़ने से रुकवाने की मुहिम हो या सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्य वे हमेशा से करते रहे हैं और करते रहेंगे। उन्होंने उनके ईसाई धर्म अपनाने के आरोप पर कहा कि पादरी के आशीर्वाद देने पर वे ईसाई कैसे बन गए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग भी उनसे आशीर्वाद लेने आते हैं तो क्या वे हिंदू बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार आगमन पर वे भूमापीठ में स्वामी भूमानंद के समय से वहां पर ठहरते थे, लेकिन उनके स्थान पर भूमापीठ के अच्युतानंद तीर्थ के घमंडी और ढोंगी होने पर उन्होंने वहां पर जाना छोड़ दिया था। उन्होंने अच्युतानंद के बारे में कहा कि कभी देखा है कि संन्यासी कुत्ता पालकर उसे मांस खिलाता है। जिस पत्र की बात अच्युतानंद कर रहे हैं वे उस चिट्ठी में उन्हें श्रंगेरी में बुलाया गया था, लेकिन उसमें यह कहां लिखा है कि वहां बुलाकर शंकराचार्य बनाया जाएगा। स्वामी वासुदेवानंद गृहस्थ व्यक्ति हैं वे कोर्ट से भी हार चुके हैं। नरेंद्रानंद जिस सुमेरू पीठ पर शंकराचार्य होने का दावा करते है तो सुमेरू कोई पीठ नहीं है।
शंकराचार्य से मिले तीन प्रमुख संत
जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप, चेतन ज्योति आश्रम के महंत ऋषिश्वरानंद और जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव देवानंद सरस्वती ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया और बंद कमरे में मुलाकात की। जानकारी के अनुसार उन्होंने देश में बढ़ते फर्जी शंकराचार्यों और सनातन धर्म को बदनाम करने वाले संतों के खिलाफ अगली कार्रवाई को मंथन किया।