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Haridwar News: 14 साल से बस सेवा ठप, 50 हजार की आबादी प्रभावित

Sun, 25 Jan 2026 05:53 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
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बहादराबाद क्षेत्र के पांच गांवों के ग्रामीणों ने की सरकारी बसें चलाने की मांग
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- ग्रामीणों ने सरकारी बसें चलाने की मांग
बहादराबाद। ब्लॉक क्षेत्र के कुतुबपुर, गढ़, मीरपुर, राजपुर और पूरणपुर पंचपुरी गांवों के ग्रामीण पिछले 14 वर्षों से परिवहन संकट से जूझ रहे हैं। करीब 50 हजार की आबादी वाले इस पूरे क्षेत्र में वर्ष 2012 से बस सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है, इससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सरकारी बसें चलाने की मांग की है।
आज भी यह इलाका बुनियादी परिवहन सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1995 से 2012 तक यहां बसों और मिनी बसों का नियमित संचालन होता था, लेकिन, उसके बाद से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई, इससे क्षेत्रवासियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं, बहादराबाद से चलने वाली मिनी बसें कुतुबपुर, गढ़, मीरपुर, राजपुर और पूरनपुर से गुजरते हुए धनौरी, कलियर और रुड़की शहर तक पहुंचती थीं। उस समय गांवों के छात्र, नौकरीपेशा लोग, महिलाओं और किसानों के लिए बड़ी राहत थी। पिछले 14 सालों से बसों का संचालन बंद होने के कारण ग्रामीण छोटे वाहनों और निजी टैक्सियों पर निर्भर हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। छात्रों को पढ़ाई के लिए मुख्य सड़क तक पैदल जाना पड़ता है, वहीं, नौकरीपेशा लोगों को समय पर कार्यालय पहुंचना कठिन हो गया है। महिलाओं की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन चुकी है। परिवहन सुविधा न होने के कारण बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभागों और प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, साथ ही जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी अपनी बात रखी गई लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। क्षेत्रवासियों ने सरकार से मांग की है कि उनके इलाके में जल्द से जल्द बस सेवा शुरू की जाए ताकि लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके।
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बोले स्थानीय निवासी
जब गांव में बसें संचालित होती थीं तब सभी को आवागमन में काफी सुविधा मिलती थी। अब हर बार निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है जिस पर अधिक खर्च आता है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। राजेंद्र कश्यप
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वर्ष 2012 के बाद से बस सेवा बंद पड़ी है, लेकिन हर चुनाव में नेताओं से इसके पुनः संचालन का आश्वासन दिया जाता रहा है। चुनाव समाप्त होते ही हमारी समस्या को नजर अंदाज कर दिया जाता है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। अवि कुमार
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निजी वाहनों का किराया अधिक होने से ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। गांव के लोग मजदूरी के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं और हर दिन लगभग पांच किलोमीटर पैदल आना-जाना उनकी मजबूरी बन चुका है।
अनुज सैनी
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कई बार प्रशासन को बस संचालन के लिए प्रार्थनापत्र दिए गए लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बीमार लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, और देर से उपचार मिलने के कारण उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है।
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अनुज कुमार
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बोले जिम्मेदार
मामला संज्ञान में ले लिया गया है। परिवहन विभाग की ओर में 30 गाड़िया आने वाली है, जिस क्षेत्र में अधिक परेशानी हो रही उस के बारे में उच्च अधिकारी को पत्राचार कर इस तरह की समस्या से अवगत कराया जाएगा।
विशाल चंद्रा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) हरिद्वार
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