प्रदेश में भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों को पकड़ने के दौरान जब्त की गई लाखों की रकम दो दिन बाद रद्दी हो जाएगी। विजिलेंस ने प्रदेश बनने के बाद अभी तक रिश्वत लेते हुए 182 अधिकारी कर्मचारियों को ट्रैप किया। इनमें 128 मुकदमों का निस्तारण न होने के कारण शिकायतकर्ताओं की रकम कई सालों से मुकदमों के फेर में फंसी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के मुताबिक एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट सिर्फ 30 दिसंबर तक बैंक खातों में जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद नोट रखने वालों को जेल तक जाना पड़ सकता है। ऐसे में साफ है कि 30 दिसंबर के बाद एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोटों की कोई कीमत नहीं रहेगी। पुलिस थानों के मालखानों में जमा लाखों रुपयों के साथ ही विजिलेंस के पास भी ऐसे लाखों रुपये दो दिन बाद बेकार हो जाएंगे, जिन्हें भ्रष्ट अधिकारियों को रंगेहाथ पकड़ने के दौरान जब्त किया गया है। प्रदेश में भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने में विजिलेंस कितनी कारगर हुई, यह अलग बात है, लेकिन विभाग की सुस्ती के चलते मुकदमों का निस्तारण नहीं हो पाया। 16 सालों में 182 मुकदमों में से 128 मामले लंबित चल रहे हैं। इनमें लाखों की रकम भी शिकायतकर्ताओं को वापस नहीं मिल पाई है। जब कभी मुकदमों का निस्तारण होने पर रकम शिकायतकर्ताओं को वापस मिलेगी तो उसकी कीमत कागज के टुकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं होगी।
वर्ष 2009 में पकड़े सबसे ज्यादा मामले
विजिलेंस ने उत्तराखंड बनने के बाद 150 से ज्यादा भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों को जेल पहुंचाया है। वर्ष 2001 से लेकर 2003 तक रिश्वत लेने का हर साल केवल एक-एक मामला पकड़ में आया। वर्ष 2004 में चार, 2005 में 9 और वर्ष 2006 में 11 भ्रष्टाचारियों को पकड़ा गया। वर्ष 2007 में 11 और 2008 में 13 मामले सामने आए। जबकि 2009 में सबसे ज्यादा 29 सरकारी सेवकों को ट्रैप किया गया। 2010 में 25 और 2011 में 12, 2012 में कुल सात और वर्ष 2013 में 15 मामले पकड़े गए। वर्ष 2014 में सात, 2015 में 19 और इस साल यानि 2016 में रिश्वत के कुल 17 प्रकरण विजिलेंस की पकड़ में आए।
पहले भ्रष्टाचार, अब सिस्टम से लड़ रहे 'हिम्मतवाले'
हरिद्वार। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी खत्म करने के लिए लोगों को समय समय पर जागरूक किया जाता है। जिसमें भ्रष्टाचारियों को विजिलेंस से पकड़वाने के लिए प्रेरित भी किया जाता है। लेकिन कोई जागरूक नागरिक हिम्मत कर आगे आता है तो उसकी रकम सालों के लिए डंप हो जाती है। कालेधन वालों को पकड़वाने के चक्कर में ऐसे तमाम लोगों का सफेद धन विजिलेंस में कचरा बनने जा रहा है। हरिद्वार निवासी डा. शिवा अग्रवाल ने वर्ष 2006 में एचआरडीए के एक जेई को 10 हजार की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस से गिरफ्तार कराया था। अभी तक 10 हजार की रकम ब्लॉक हो रखी है। नोटबंदी के चलते रकम बेकार होने की संभावना पर डा. शिवा ने एसपी विजिलेंस को चिट्ठी भी भेजी है।
इस तरह का मामला सामने आने पर कोई न कोई हल निकाला जाएगा। कोर्ट से अनुमति लेकर बैंक में खाता खुलवाया जाएगा और शिकायतकर्ताओं को नई रकम दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
- प्रमोद कुमार, प्रभारी पुलिस अधीक्षक विजिलेंस, उत्तराखंड