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बैंक की लाइन में कटा संडे

Sun, 13 Nov 2016 11:35 PM IST
hridwar uttrakhanda india
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रुपये के लिए मारामारी - फोटो : अमर उजाला
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 एक हजार और पांच सौ रुपये का नोट बंद होने के बाद पड़े पहले रविवार को बैंकों में ऐसा हुजूम उमड़ा कि लोगों के साथ बैंक कर्मियों का भी पसीना निकल गया। रविवार की छुट्टी लोगाें की पूरे दिन बैंक में लाइन पर लगकर ही गुजर गई। यही हाल शहर के एटीएएम का भी था। एटीएम जहां नगदी डलने के चंद मिनट में ही खाली हो गए, वहीं अधिकांश बैंकों में भी शाम चार बजे तक नगदी खत्म हो गई। हजारों लोगों को खाली हाथ घरों को  लौटना पड़ा।
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बुधवार से चल रही मारामारी के बीच लोगों की सुविधा के लिए शनिवार और रविवार को भी बैंक खोलने के आदेश दिए गए थे। पिछले चार दिन से बैंकों में जबरदस्त भीड़ उमड़ रही थी। रविवार को सरकारी विभागों और  फैक्ट्री, कारखानों में छुट्टी होने के कारण बैंकों में भीड़ कई गुना बढ़ गई। बैंक खुलने से पहले ही सुबह सात बजे से लोगों की लाइन लगने लगी थी। खासकर भेल सेक्टर चार स्थित पीएनबी की मंडल शाखा, भेल मेन गेट के  सामने स्टेट बैंक शाखा में लोग सुबह का नाश्ता किए बिना ही आकर लाइन में लग गए थे। बैंक खुलने पर हर घंटे भीड़ बढ़ती चली गई।
भेल सेक्टर एक,  शिवालिक नगर, ज्वालापुर गुरुद्वारा रोड, मध्य हरिद्वार में पीएनबी की अहमदपुर ब्रांच, कनखल चौक बाजार, रेलवे रोड हरिद्वार, अपर रोड आदि में अलग अलग बैंकों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी रही। भेल में पीएनबी  मंडल शाखा मेें एटीएम नगदी डलने के चंद मिनट में ही खत्म हो गई। रानीपुर  मोड़ के पास स्थित एचडीएफसी, एक्सिस, पीएनबी, बैक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक,  कॉपरेटिव बैंक बहादराबाद में भी बैंकों में शाम चार बजे तक लाइनें लगी रही।  तमाम बैंकों में छोटे नोट और नए बड़े नोट खत्म हो गए।
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- कहीं शादी पर खतरा तो किसी के प्रसव पर संकट
- बैंकों के बाहर लाइनों में लगे लोग एक दूसरे को सुना रहे दुखड़ा
- गुजर बसर के लिए दिहाड़ी मजदूरी छोड़कर लग रहे लाइनों में
मेहताब आलम
हरिद्वार। किसी का घर बसने में रुकावट तो किसी के दुनिया में आने पर ही संकट। घर में चूल्हा जलाने के लिए कोई दिहाड़ी छोड़कर लाइन में लग रहा है तो कोई पैसे देकर दूसरों को लाइन में लगा रहा है।
नोटबंदी के बाद आर्थिक संकट से घिरे आम आदमी पर हालात के तकाजे टूट पड़े हैं। बैंकों के बाहर मजबूरियों की लाइन का हाल यह है कि लोग घंटों एक साथ खड़े होकर एक दूसरे को अपना दुखड़ा सुनाते हुए मन हल्का कर रहे हैं। बड़े नोट बंद होने से यूं तो हर वर्ग प्रभावित हुआ है। लेकिन शादियों के सीजन में ऐसे परिवारों पर चिंताओं का पहाड़ टूट पड़ा है, जिनको बेटा बेटियों की शादी करनी है। कुछ ऐसे लोग भी लाइन में नजर आए, जिनके अपने अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें आपरेशन या डिलीवरी के लिए अस्पताल ले जाना है। उन्हेें बार बार यह डर सता रहा है कि नोट बंदी कहीं उनकी खुशियों पर कहर बनकर न टूट जाए।
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कैसे हो अतिथि सत्कार
हरिद्वार। भेल सेक्टर चार पीएनबी मंडल शाखा पर लाइन में लगे अजय पाल सिंह ने बताया कि अगले हफ्ते उनके छोटे भाई की शादी है। भेल मेन गेट के सामने एसबीआई शाखा में सुबह आठ बजे से लाइन में लगे ज्वालापुर अंबेडकरनगर निवासी शिवदत्त भी इसी चिंता में डूबे हैं। उन्होंने बताया कि बेटे की रिंग सेरेमनी से लेकर बारात ले जाने, मेहमानों के खाने, ठहरने तक का पूरा इंतजाम करना है। बैंक से निकालकर पहले से घर में रखे गए नोट बेकार हो गए हैं। टैक्स चुकाने के बावजूद बैंक में जमा अपना रुपया भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
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सर मेरी पत्नी प्रेगनेंट है
मूल रूप से करनाल के रहने वाले चरणजीत सिंह आठ साल से हरिद्वार में परिवार के साथ रह रहे हैं। रविवार की सुबह नौ बजे से लाइन में लगे चरणजीत से जब बात की गई तो उनके सब्र का बांध ही टूट पड़ा। चरणजीत का कहना था कि सर मेरी पत्नी प्रेगनेंट हैं, अगले दो तीन दिन में डिलीवरी करानी है। देशभर से अस्पतालों में मरीजों के साथ अनहोनी की खबरें आ रही हैं। सुबह से लाइन में लगा हूं, अभी तक पैसे नहीं मिले। आप ही बताएं क्या करूं।
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दिहाड़ी छोड़कर बदलने पहुंचे नोट
सिडकुल की फैक्ट्रियों में काम करने वाला एक बड़ा तबका ऐसा है, जो ठेकेदार की मार्फत मामूली दिहाड़ी पर काम करता है। उसके लिए रविवार की छुट्टी भी एक दिन ज्यादा मजदूरी कमाने का होता है। रविवार को बैंक के बाहर सिडकुल के श्रमिकों की संख्या सैकड़ों में रही। लाइन में लगे श्रवण ने बताया कि नाइट ड्यूटी कर सुबह सात बजे घर पहुंचे। आठ बजे से बैंक में आकर लाइन में लगा हूं। अनिल कुमार, प्रतीक श्रीवास्तव, बृजमोहन, विनोद आदि श्रमिकों ने बताया कि वह दिहाड़ी छोड़कर नोट बदलने आए हैं।
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वरिष्ठ नागरिक भी परेशान
बैंक की लाइनों में बुजुर्गों की संख्या भी बहुत है। शिवालिक नगर निवासी एमके गुप्ता ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सरकार हर जगह वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से व्यवस्था का दावा करती है, लेकिन यहां बुजुर्गों को घंटों लाइन में खड़े होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। शिवा शंकर, अरविंद गुप्ता, शेखर चौहान आदि ने कालेधन पर लगाम की सराहना की, लेकिन होमवर्क न होने से आम लोगों की परेशानी देखते हुए मोदी सरकार को जमकर कोसा। छह बजे तक का दावा और चार बजे बैंक बंद होने पर भी लोगों में आक्रोश दिखाई दिया।
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टिफिन लेकर लगे लाइन में
पहले दिन बैंक की लाइन में लगने वालों को शायद परेशानी का अंदाजा कम हो, मगर जो लोग दो या तीन दिन से रोजाना बैंक आ रहे हैं, वह पूरी तैयारी के साथ पहुंच रहे हैं। पहले दिन आने वाले लोग भूख प्यासे लाइन में लग रहे हैं। जबकि दूसरे या तीसरे दिन आने वाले लोग टिफिन लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं कुछ लोग लाइन में लगकर ही खाना खाते नजर आए।
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