बुद्ध पूर्णिमा पर सूना पड़ा हरकी पैड़ी ।
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बुद्ध पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं ने अपने घरों में स्नान के बाद अनेक प्रकार के फल और जल से भरे कलश दान किया। कुछ घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया लेकिन हरकी पैड़ी पर केवल गंगा पूजन और आरती ही हो पाई। आज शुक्रवार से पवित्र ज्येष्ठ मास प्रारंभ हो गया है। इसी के साथ एक महीने चलने वाले वैशाख स्नान का भी औपचारिक समापन हो गया।
कोरोना के कारण यह पूरा महीना श्रद्धालुओं ने घर पर ही स्नान कर बिताया। वैशाख मास का स्नान करने कोई भी श्रद्धालु नहीं आ पाया। आखिरी पांच दिनों में होने वाली वैशाख की पंच स्नानी भी गंगा के तटों पर नही हुई। गुरुवार को गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले श्रद्धालु कुशावर्त घाट, हनुमान घाट, श्रवणनाथ घाट, राम घाट आदि तक थोड़ी-थोड़ी संख्या में पहुंचे। डुबकी लगाकर ये श्रद्धालु अपने घरों को लौट गए। प्रशासन के प्रबंधों के चलते हरकी पैड़ी और सुभाष घाट पर स्नान नहीं हो सका। अलबत्ता कनखल के राज घाट और दक्ष घाट अनेक कनखल वासियों ने स्नान के बाद दूरी बनाकर वैशाख पूजा की। बुद्ध पूर्णिमा के दिन अनेक प्रकार के फल, मिठाई, वस्त्र और जल से भरे कलश का दान किया जाता है। प्रतिबंधों के चलते नगर वासी फल और मिट्टी के कलश ही दान कर पाए। वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान नृसिंह, कूर्म तथा सत्य नारायण के विष्णु स्वरूप की आराधना की गई।
शुक्रवार से ज्येष्ठ मास प्रारंभ हो रहा है। इस महीने गंगा अवतरण दिवस, निर्जला एकादशी और वट सावित्री व्रत के महापर्व पड़ेंगे। इसी महीने सूर्य देव वृष राशि में प्रविष्ट होंगे। ज्येष्ठ मास में अनेक आकाशीय ग्रह परिवर्तन भी हो रहे हैं।