आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के ऋषिकुल परिसर के 200 बेड के अस्पताल का मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पताल में मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियां सप्लाई नहीं होने से क्वाथ (काढ़ा) नहीं बन रहा है। क्वाथ के साथ महत्वपूर्ण दवा भी नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रासाउंड केंद्र का ताला भी सात वर्षों से नहीं खुल सका है। एक्स-रे का भी विश्लेषण नहीं हो पा रहा है।
ऋषिकुल कालेज परिसर में जनपद का सबसे बड़ा अस्पताल है। अस्पताल के साथ कालेज में 50 प्रोफेसर डाक्टर के साथ 54 एमडी कार्यरत प्रशिशु डाक्टर हैं। अस्पताल चलाने के लिए समय पर बजट न मिलने से दवा के साथ अन्य सुविधाओं को चलाना मुश्किल हो रहा है। यह स्थिति आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के बनने और उससे संबद्ध होने के बाद हुआ है। अस्पताल में मरीजों के मर्ज को जड़ से मिटाने वाले अधिकांश क्वाथ भी नहीं हैं। अस्पताल में 14 क्वाथ तैयार किए जाते थे, लेकिन फिलहाल कुल तीन क्वाथ ही तैयार किए जा रहे हैं। महाविद्यालय प्रशासन की मानें तो क्वाथ के लिए बिजनौर, मुरादाबाद, मेरठ के साथ प्रदेश के दूर दराज के मरीज पहुंचते हैं। इन्हीं के साथ ही कई मर्जों के लिए गोलियां भी नहीं है।
इन क्वाथ का है संकट
पेशाब रोगों के लिए वरुणादि एवं वरुण शिशु क्वाथ, खांसी के लिए कंटकारी क्वाथ, उच्च रक्तचाप के लिए जटमासी क्वाथ, जुकाम के लिए गोजिवादि एवं शिरिषादि क्वाथ, सूजन कम करने के लिए पुर्ननवाष्टक क्वाथ, किडनी के लिए तृणपंचमूल क्वाथ, पथरी के लिए पाषाण भेद क्वाथ, बुखार के लिए अमृताष्टक क्वाथ, पीलिया के लिए फलतिकादि क्वाथ नहीं है।
ये क्वाथ बनाए जा रहे हैं
दर्द निवारक महारास्नादि क्वाथ एवं दशमूल क्वाथ और रक्त विकार महामंजिष्ठादि क्वाथ बनाए जा रहे हैं
ये दवाई नहीं है
एंटीबायोटिक्स में पंचसकार एवं त्रिफला जैसी दवा नहीं है। इन्हीं के साथ ही टोनिक्स आरोग्यवर्धनी, प्रवाल भस्म, दर्द के लिए शेख भस्म, खासी जुकाम के लिए कामदुधा आदि दवाई भी नहीं है।
दवा एवं जड़ी बूटियां के खरीदने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से टेंडर हो गए है। इसके बाद दवाओं की कमी दूर हो जाएगी। पहले बजट मिलने के बाद ही कालेज प्रशासन ही दवा खरीदता था, लेकिन नए विश्वविद्यालय बनने के बाद कुछ समस्याएं हुई है। क्वाथ बनवाने को जड़ी-बूटियां खरीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन से रेडियोलॉजिस्ट न मिलने से अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद है। - प्रो. आदित्य नारायण पांडेय, निदेशक, ऋषिकुल परिसर।