सिडकुल। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर रहने से दस दिनों से केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। कार्यकर्ताओं के आंदोलन से केंद्रों पर काम नहीं होने से महिलाओं और बच्चों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
11 सूत्रीय मांगों के लिए प्रदेशव्यापी आह्वान पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठी कार्यकर्ताओं के कारण जिले की योजनाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। आंदोलन से 3300 आंगनवाड़ी केंद्रों में से सैकड़ों केंद्रों पर ताला लटका हुआ है। नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं ठप हो गई हैं।
जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वर्तमान में इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों के लिए सरकार से गुहार लगा रही हैं लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ है। इसी के विरोध में अब कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाया गया है। आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं की मांगों में मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करना, राजकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाना, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी की सुविधा, पदोन्नति में पारदर्शिता और विभागीय वरीयता आदि हैं। आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन और विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं लेकिन अब तक शासन स्तर से मांगों के निराकरण के लिए कोई ठोस प्रस्ताव सामने नहीं आया है इससे कार्यकर्ताओं में आक्रोश व्याप्त है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेविका मिनी कर्मचारी संगठन की जिलाध्यक्ष हितेश चौहान का कहना है कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।