हरिद्वार। जिले में अभी तक किराये के भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चलाने वाली कार्यकत्रियों के लिए अच्छी खबर है। अब इन आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना घर मिलने वाला है। इस साल पांच सौ केंद्रों के लिए भवन बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 48 के लिए काम शुरू कर दिया गया है। नए भवन बनने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर अधिक सुविधाएं जुटाई जा सकेंगी।
जिले में पांच सौ से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। कई बार ऐसा भी देखने में आया कि कई महीने तक सरकार की ओर से इन केंद्रों के लिए किराया नहीं भेजा गया, जिससे मकान मालिक और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बीच अनावश्यक गतिरोध बना। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को धरना-प्रदर्शन तक करना पड़ा। अब सरकार की ओर से इन केंद्रों की सुध ली गई है। मुख्य विकास अधिकारी सोनिका ने बताया कि पांच सौ केंद्रों के लिए भवन इस साल के अंत तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 48 के लिए प्रशासन ने काम शुरू भी कर दिया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा और आईसीडीएस योजना के तहत बन रहे इन भवनों से इन केंद्रों में सुविधाओं का विकास हो सकेगा।
सीएम की योजना है मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र
कुपोषण से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। पिछले साल ‘खिलती कलियां’ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए भेल के कन्वेंशन हॉल में आए सीएम हरीश रावत ने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया था कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम एक आंगनबाड़ी केंद्र को गोद लें और उन्हें मॉडल के रूप में विकसित करें। हर केंद्रपर वाटर प्यूरी फायर और नेल कटर की उपलब्धता अनिवार्य रूप से कराने की मांग की गई है।