बच्चे को बचाने के लिए लगाई जान
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हरिद्वार। सुपर हिट फिल्म शोले का मशहूर डायलॉग ‘जो डर गया समझो मर गया’ गुर्जर परिवार की महिलाओं पर बिल्कुल सटीक बैठता है। वे बेबाकी से बोलती हैं कि हिम्मत न दिखाती तो घर का कोई सदस्य अपनी जान गंवा ही बैठता। खूंखार गुलदार से भिड़कर उसे ढेर कर देने वाली मातृ शक्ति के चेहरे पर रत्ती भर भी खौफ नहीं दिखा।
बहू और बेटियों के साथ गुलदार से भिड़ गई गुन्नू बीबी पूछने पर बोली कि बहू की चीख सुनकर सीधे बेटियों के साथ डंडे लेकर पहुंची। एक डंडा जब दूर से ही गुलदार को फेंककर मारा तब वो सीधे संदूक के पीछे जा घुसा। फिर बिना घबराए सीधे संदूक के पीछे घुसे गुलदार के मुंह को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ वार कर दिए। वो दहाड़ रहा था। उसकी आंखें भी चमक रही थी। एक बारगी घबराहट हुई। पर, जान का सवाल था। गुलदार हमला बोल देता तो किसी न किसी की जान ले ही लेता। आधे घंटे तक बिना ठहरे गुलदार पर डंडे बरसाते ही रहे, जब तक उसकी आवाज शांत नहीं हो गई। बेटियां शकूरा, जुलेखा बोलती है कि जंगल में गुलदार कई बार देखा था, पर आमना- सामना अब हुआ। भले ही बीरा जख्मी थी, पर उसके चेहरे पर साहस की झलक साफ दिखाई देती थी।
डेरों के इर्द गिर्द घूमते है गुलदार
जंगल में रह रहे गुर्जर परिवारों के लिए गुलदार कोई नया नाम नहीं था पर उनकी जान पर भी बन आएगी यह नहीं सोचा था। गुर्जरों की माने तो जंगल में अक्सर गुलदार दिखता ही है। उनके पालतू पशु भी गुलदार के निशाने पर रहते है। डेरों के इर्द गिर्द भी अक्सर गुलदार मंडराते रहते है, लेकिन डेरे में घुस आएगा इसका अहसास कभी नहीं हुआ।
चेहरे को बनाया टॉरगेट
गुलदार के चेहरे को ही टॉरगेट कर महिलाओं ने अपनी जंग जीती। मारे गए गुलदार के चेहरे को देखकर यह साफ दिखाई देता है। उसकी आंखें तक बाहर निकल आई। ये डंडों के ही प्रहार का असर है। एक डंडा उसके शरीर में ही घुसा हुआ दिखाई दे रहा है।