हरिद्वार। हरीश रावत सरकार की लुटिया डुबोने में जुटे भारतीय जनता पार्टी के तीनों विधायक घर लौट आए। कार्यकर्ताओं से मिले लोगों की समस्याएं सुनीं। तीनों ही पूर्व विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अराजकता का माहौल बन गया था।
18 मार्च को राज्य विधानसभा में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत हो जाने के बाद से ही भाजपा के भी सभी विधायक बाहर थे। पहले गुड़गांव फिर दिल्ली और उसके बाद उन्हें जयपुर ले जाया गया था। रविवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद इनकी घर वापसी का रास्ता खुला। सोमवार को तीनों विधायक मदन कौशिक, स्वामी यतीश्वरानंद और आदेश चौहान घर लौट आए। मदन कौशिक ने घर पहुंचने के बाद अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। क्षेत्र की राजनीतिक घटनाक्रम आदि के बारे में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अपनी सरकार बचाने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त का नंगा नाच कर हरीश रावत ने लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा कि यह अराजकता और माफियावाद की सरकार थी। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना जरूरी था। अब विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इस दौरान पार्षद राजेश शर्मा, मंडल अध्यक्ष प्रदीप कालरा, मुकेश कौशिक नरेश शर्मा मंडल मंत्री संजीव तोमर, रमेश गौड़, सुरेश कुमार, शक्ति त्यागी, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
दूसरी ओर स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि हरीश रावत के कार्यकाल में विकास का पहिया ठप हो गया था। आदेश चौहान ने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं की उपेक्षा करने और माफिया को गले लगाने का खामियाजा हरीश रावत को भुगतना पड़ा है। विधानसभा के बाहर धरना देने के बाद भी रावत ने उनके क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए कोई पहल नहीं की।