हरिद्वार। एनजीटी के आदेशों का अनुपालन करने के नाम पर प्रशासन की कार्रवाई को उत्पीड़नात्मक बताते हुए होटल, धर्मशाला, आश्रमों के संचालकों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बृहस्पतिवार शाम हुई बैठक में आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया गया। हरिद्वार रामलीला भवन में बैठक के दौरान एक संघर्ष समिति का गठन भी किया गया।
समिति के संस्थापक संरक्षक बनाए गए जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत देवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन के अधिकारी धार्मिक संपत्तियों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का टैक्स लगाने का तुगलकी फरमान जारी कर उत्पीड़न कर रहे हैं। यदि एनजीटी के आदेशों का पालन कराना है तो सबसे पहले गंगा में गिरने वाले गंदे नालों को बंद कराया जाए। गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी और महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि हरकी पैड़ी क्षेत्र में अधिकारियों के संरक्षण में ही व्यापारिक गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन प्रशासन चुप है।
धर्मशाला सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश गौड़ व स्थानीय अध्यक्ष महंत श्यामपुरी और महामंत्री विकास तिवारी ने कहा कि प्रशासन कभी गृहकर तो कभी सीवर कर के नाम पर धर्मशाला संचालकों का उत्पीड़न करता है। कार्रवाई के विरोध में धर्मशालाएं बंद करने की चेतावनी भी दी। व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष सुरेश गुलाटी, ओमप्रकाश जमदग्रि ने भी आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में होटल एसोसिएशन की ओर से आशुतोष शर्मा, बजट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, अरविंद शर्मा, व्यापार मंडल के शहर अध्यक्ष संजीव नैयर, शिवकुमार कश्यप, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से प्रभात कुमार, विनीत धीमान, अविनाश चंद्र ओहरी, जगदीश लाल पाहवा, अनिरुद्ध भाटी, इंद्रेश आहूजा, चंद्रप्रकाश, संजय अरोड़ा आदि बैठक में शामिल हुए।