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अच्युतानंद का पट्टाभिषेक कल

Wed, 22 Feb 2017 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ शिवरात्रि (24 फरवरी) को शारदा पीठ द्वारिका के जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर आसीन होंगे। उनके पट्टाभिषेक के लिए काशी विद्वत परिषद के विद्वान बृहस्पतिवार को हरिद्वार पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा की है। सन्यासी अखाड़ों की संन्यास परिषद ने भी ऐसे किसी पट्टाभिषेक को अवैध ठहराया है।       
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द्वारिका की शारदा पीठ पर वर्षों से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आसीन हैं। भूमा पीठ की ओर से सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी निगमानंद बोध तीर्थ, ब्रह्मानंद सरस्वती, डा. प्रेमानंद और राजेंद्र शास्त्री की ओर से जारी निमंत्रण पत्र के अनुसार 24 और 25 फरवरी को हरिपुर के अद्भुत मंदिर परिसर में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ शारदा पीठ के शंकराचार्य बनेंगे। उनका पट्टाभिषेक काशी से आए विद्वत परिषद के विद्वान करेंगे।

इस आयोजन पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कहा है कि जिस पीठ पर स्वामी स्वरूपानंद पहले से आसीन हों, उस पर किसी को पीठाधीश्वर नहीं बनाया जा सकता। अच्युतानंद फर्जी रूप से इस पद पर आसीन हुए तो उनका अन्न- -जल-संत समाज से बंद कर दिया जाएगा। इस आयोजन को तत्काल निरस्त कर देना चाहिए।
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अखिल भारतीय संन्यास परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि संन्यास परिषद से अनुमति लिए बिना कोई संन्यासी शंकराचार्य पद के लिए अधिकृत नहीं हो सकता। अच्युतानंद की ओर से स्वयंभू शंकराचार्य बनना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्त महंत मोहनदास ने कहा कि इस फर्जी आयोजन में कोई संत गया

देश में शंकराचार्यों की केवल चार पीठ हैं। श्रृंगेरी पीठ पर स्वामी भारती तीर्थ, गोवर्द्धन पीठ पर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, शारदा और ज्योर्तिपीठों पर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पहले ही आसीन हैं। इन पीठों पर अन्य किसी को बैठने का अधिकार नहीं है। अखाड़ा परिषद ऐसे किसी भी स्वयंभू शंकराचार्य को संत जगत में प्रवेश नहीं करने देगा।
- श्रीमहंत नरेंद्र गिरी, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद      
      

पहले भी जिन साधु संतों ने अखाड़ा परिषद के आदेश का पालन नहीं किया, उन्हें अखाड़ों से डामिस कर दिया गया। डामिस का अर्थ है कि ऐसे संतों को न कोई बुलाता है और न कोई उनके कार्यक्रमों में जाता है। ऐसे संत यदि समाज के अन्य आयोजन में भी बुलाए जाएं तो संत जगत उन आयोजनों में भी भाग नहीं लेता। अच्युतानंद का निर्णय धर्म विरुद्ध है। साथ ही शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपराओं का भी घोर उल्लंघन है। - श्रीमहंत हरिगिरी, महामंत्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद      
      
पूरे समाज का ठेका न ले अखाड़ा परिषद      
अखाड़ा परिषद स्वयं को अखाड़ों के कार्यकलापों तक सीमित रखे। नरेंद्र गिरी पूरे संत समाज का ठेका न लें। परिषद यह देखे कि किस प्रकार आज गृहस्थ से आए व्यक्तियों को भी संन्यास दिला दिया जाता है। यही नहीं गृहस्थ छोड़ने वालों को अखाड़े महामंडलेश्वर तक बना देते हैं। स्वामी अच्युतानंद तीर्थ हर सूरत में शारदा पीठ पर आसीन होंगे। कार्यक्रम रोकने का कोई प्रयास बर्दाश्त नहीं होगा।
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 - राजेंद्र शर्मा, प्रवक्ता स्वामी अच्युतानंद तीर्थ एवं भूमा पीठ     
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