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... शुक्र करो की लौट आए हैं

Thu, 20 Jun 2013 05:30 AM IST
Haridwar
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हरिद्वार। ... दस घंटे तक जाम में फंसे रहे। आसपास खाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। पास में कुछ सत्तू था, उसे खाकर ही जीने का जुगाड़ किया। ऊपर से पानी बरस रहा था लेकिन पीने का पानी लगातार कम होता जा रहा था। पास में जो बोतल थी, उनका पानी बूंद-बूंद कर पीया। प्यास लगी थी लेकिन केवल होंठ गीले करते रहे।
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बदरीनाथ से लौटकर आए मध्य प्रदेश के सीधी जिले के भनवारी गांव के आठ सदस्यों के चेहराें पर आपदा की आपबीती बताते हुए भय और चिंता की लकीरें खिंच आई। हरिद्वार के रेलवे स्टेशन पर बैठे श्रद्धालु गंगा प्रसाद द्विवेदी, देववती द्विवेदी, भाईलाल द्विवेदी, कमला देवी द्विवेदी, संतोष देवी, कमला देवी, डीएल शर्मा, कुसुम द्विवेदी ने बताया कि 15 जून की सुबह से ही हल्की बूदाबांदी हो रही थी। वह हल्की बूंदाबांदी में ही वहां से निकल गए। बदरीनाथ के नजदीक गोविंद घाट में सड़क पर मलवा आने से रात भर 10 घंटे जाम में रहे। रात भी जाम में ही कट गयी। घर से लाये सत्तू और ड्राईफूड खाकर रात में भूख बुझायी। बोतलों में रखा पानी रातभर बूंद बूंद कर पिया। 16 जून की सुबह तीन बजे गोविंद घाट से चले तो तेज बारिश होने लगी। कर्णप्रयाग में एक घंटे जाम में फंसे रहे। सड़क पर पड़े मलवे को सीमा सड़क संगठन के जवान साफ कर रहे थे। रूद्रप्रयाग में भी सड़क पर मलवा आ गया था। मलवा आने से दो घंटे रूद्रप्रयाग में भी खडे़ रहे। यहां से आगे बढ़े और श्रीनगर होते हुए जैसे ही देवप्रयाग पहुंचे तो वहां हालात और बुरे मिले। तीन किलोमीटर से ज्यादा जाम मिला। रविवार को सांय चार बजे के देवप्रयाग पहुंचे जाम खुलने के बाद रात साढे दस बजे ऋषिकेश पहुंचे। जहां भगवान आश्रम में ठहरे।
चारधाम यात्रियों ने बताया कि 16 जून की रात केदारनाथ घाटी में आयी बाढ़ की फोटो अमर उजाला में देखकर भगवान बदरीनाथ का शुक्र अदा कर रहे हैं, जो वह लोग सुरक्षित निकल आए।
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