हरिद्वार। टिबड़ी में मासूम बच्चों को हवस का शिकार बनाने की घटनाओं ने बस्ती के खासोआम को झकझोर कर रख दिया है। हर किसी की जुबां पर एक ही बात है आखिर क्या हो गया है टिबड़ी को। यहां तीन घटनाएं हो चुकी हैं। दो मामलों में आरोपी ने दुष्कर्म करने के बाद मासूम को मौत की नींद सुला दिया। जबकि तीसरी घटना में 11 वर्षीय बच्चा किसी तरह बचकर भाग निकला।
बीएचईएल, शहर की सीमा से सटी और शिवालिक पर्वत माला की तलहटी में बसी बस्ती टिबड़ी में अधिकतर मध्यम परिवार के लोग रहते हैं। पिछले दो वर्ष में यहां से तीन मासूमों को दरिंदों ने अपनी हवस का शिकार बना डाला। वर्ष 2010 में एक नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इसका शव भेल आवासीय कालोनी के पीछे झाड़ियों में मिला था। आरोपी टिबड़ी का ही युवक निकला। गिरफ्तार कर पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया था। आरोपी दो साल बाद जब जमानत पर रिहा हुआ तो उसने एक बालक को फिर अपनी हवस का शिकार बना डाला। बालक को पहले अगवा किया गया फिर दुष्कर्म किया गया। उसके बाद आरोपी ने बालक की गला घोंट कर हत्या कर दी गई। 10 नवंबर 2012 को बालक की लाश पास ही एक तालाब में मिली। अभी टिबड़ी के लोग इन दोनों सदमों से उबरे भी नहीं पाए थे कि बुधवार को एक ओर मामला सामने आया। इस बार 11 साल के बालक के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया। इसमें भी आरोपी टिबड़ी का निकला। आरोपी चालक को गिरफ्तार किया गया। इन तीनों घटनाओं से लोग सदमे में तो हैं ही शर्मसार भी हैं। पूछ रहे हैं हमारी टिबड़ी को यह क्या हो गया है।
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नशाखोरी बन रहा कारण
दुष्कर्म की घटनाओं में इजाफे के पीछे नशाखोरी मुख्य वजह बताया जा रहा है। तीनों ही मामलों में आरोपी नशे के आदी हैं। अवैध शराब तस्करी भी इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा होती है। कई बार लोग पुलिस को इसके शिकायत कर चुके हैं। बावजूद इसके कार्रवाई नहीं हो रही जिसकी वजह से क्षेत्र में शराब तस्करी नहीं रुक रही है।