अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
निलंबित जज दीपाली शर्मा के घर से मुक्त कराई गई नैनीताल की किशोरी के माता- पिता ने डीएम दीपक रावत उनकी बेटी को उन्हें सौंपने की गुहार लगाई है। सोमवार को बाल कल्याण समिति के आदेश पर माता- पिता की साढ़े तीन माह बाद अपनी बेटी से मुलाकात हो सकी थी। समिति ने बालिका को सुपुर्द करने के मसले पर सोमवार को फैसला लेने की बात कही है।
29 जनवरी को हाईकोर्ट में की गई शिकायत के आधार पर जिला जज राजेंद्र सिंह चौहान, एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने रोशनाबाद में जजेज कालोनी में तब सिविल जज (एसडी) रही दीपाली शर्मा के घर से नैनीताल के पुटगांव तहसील धारी की किशोरी को बरामद किया था। मेडिकल परीक्षण में उसके शरीर पर नए- पुराने चोटों के करीब 24 निशान पाए गए थे। एएसपी रचिता जुयाल की ओर से इस संबंध में महिला जज के खिलाफ किशोरी को दास बनाकर रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। बाल कल्याण समिति ने बालिका को अनाथ शिशु ट्रस्ट ऑफ इंडिया श्रीराम आश्रम श्यामपुर में दाखिल किया था। फरवरी में यहां पहुंचे पिता हेमचंद्र दानी एवं मां को बाल कल्याण समिति ने मुलाकात के आदेश नहीं दिए थे। बल्कि बालिका के आधार कार्ड पर सवाल खड़े कर दिए गए थे, फिर इसकी जांच नैनीताल पुलिस को सौंप दी थी। उसके बाद अब अपनी बेटी से मिलने आए मां -बाप को बाल कल्याण समिति ने मुलाकात के आदेश दे दिए थे। सोमवार को मां -बाप ने बेटी से मुलाकात कर ली थी। जब वह मंगलवार को बाल कल्याण समिति के कार्यालय पर पहुंचे तो उन्हें यह कहकर चलता कर दिया गया कि कोरम पूरा नहीं होने पर सुपुर्दगी पर फैसला नहीं हो सका है। समिति के अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि अब आगामी सोमवार को सुपुर्दगी पर फैसला लिया जाएगा। इसके बाद माता- पिता जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे थे।
मां- बाप होने का देना पड़ा सबूत
हरिद्वार। हैरानी की बात है कि मां- बाप को अपनी बेटी से मिलने में साढ़े तीन माह का वक्त लग गया। अपनी बेटी से मुलाकात के लिए उन्हें साबित करना पड़ा कि वही उसके मां बाप है। इसके लिए उन्हें पुलिस की जांच से गुजरना पड़ा। अब जब साढ़े तीन माह बाद मां- बाप अपनी बेटी से मुलाकात करने में कामयाब रहे तो उसकी सुपुर्दगी के लिए उन्हें फिर पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। मामला हाईप्रोफाइल होने से जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने पल्ला झाड़ लिया है।