हरिद्वार। अखाड़ों में रहकर अखाड़ों के विरुद्घ कार्य करने वाले बाबाओं को अब दंडित किया जाएगा। सभी संन्यासी अखाड़ों में ऐसे संतों की पहचान का काम शुरू हो जाएगा। बैरागी अखाड़ों में अपने यहां पर जांच पड़ताल प्रारंभ की है, लेकिन सर्वाधिक विवाद संन्यासी अखाड़ों में है।
हाल ही में अखाड़ा परिषद और निरंजनी अखाड़ा ने अखाड़े के सचिव महंत रामानंद पुरी के खिलाफ कार्रवाई की थी। उन्हें सचिव पद से हटाया गया और अब अखाड़ा से ही हटाने की तैयारी है। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि जो संत अखाड़ों में रहते हैं, उनके सभी क्रिया कलापों की जिम्मेदारी अखाड़े की है। यदि वे निजी संपत्ति एकत्रित करते हैं तो वह संपत्ति अखाड़े में निहित कर दी जाएगी। रामानंद पुरी के बारे में ऐसा हो चुका है। अखाड़ा परिषद ने पहले ही उनके कार्य को गलत ठहराया था। अब जूना अखाड़ा के थानापति त्रिकालदर्शी शिवमपुरी के बारे में लगातार शिकायतें मिल रही है। उन्हें आगाह भी किया जा चुका है। यहां तक कि अखाड़े की अनुमति के बगैर बयान दिए जा रहे हैं और अनेक व्यवसायिक इकाइयां शुरू की जा रही हैं। कुछ बयानों से जूना अखाड़े की साख को गहरा धक्का लगा है। अखाड़े के श्रीमहंतों, महामंडलेश्वरों और यहां तक की आचार्य के पास से भी इस प्रकार की जानकारियां हासिल की जा रही है। हरिद्वार से हेलीकॉप्टर उड़ाने की बात कहकर उन्होंने अखाड़े को बदनाम ही नहीं किया, बल्कि अपना अलग साम्राज्य खड़ा कर दिया। थानापति जिस मढी से आते हैं, उसके सभापति और अन्य पदाधिकारियों से वार्ता की गई है। उन्होंने कहा है कि अखाड़ा सर्वोच्च है, व्यक्ति नहीं। ऐसेे लोगों को किसी भी सूरत में अखाड़े में रहने नहीं दिया जाएगा जो संन्यशास लेने के बाद भी व्यापार कर रहे हैं।
श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा है कि अखाड़ा परिषद ने सभी अखाड़ों से इस दिशा में पड़ताल करने का आग्रह किया है। साधुओं को अखाड़ों में अखाड़े और सामाजिक कार्य करने के लिए लाया जाता है। उनका पहला उद्देश्य अखाड़ों का संर्वधन होना चाहिए। इसके बावजूद कुछ और संतों का पता चला है जो परंपरा तोड़ रहे हैं। हाल ही में अखाड़ा परिषद ने कुछ फर्जी साधुओं को अखाड़ा परिषद से बहिष्कृत किया है, जो साधु अखाड़े में फर्जी धंधे चलाएंगे, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।