अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम बोर्ड की विदाई की प्रतीक्षा कर रहे नगर निगम के अधिकारियों को इस बार शहर के बरसाती नालों की सुध नहीं है। नगर निगम प्रतिवर्ष अप्रैल से 15 मई तक सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई कराता है, ताकि बरसात में जलभराव की स्थिति का सामना न कराना पड़े। इसकी तैयारी मार्च से होने लगती थी परंतु इस बार अब तक बरसाती नालों की सफाई की चर्चा तक नहीं हो रही है।
शहर में आठ बड़े बरसाती नाले हैं, जिनकी सफाई जेसीबी से करानी पड़ती है। इसके अलावा शहर में करीब 102 छोटे नाले हैं जिनकी सफाई मैनुअल कराई जाती है। पहले नालों की सफाई ठेके पर कराई जाती थी, लेकिन कुछ समय से तत्कालीन नगर आयुक्त ने हिम्मत दिखाकर नालों की सफाई नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की नाला गैंग बनाकर कराने का निर्णय लेकर इस गोरखधंधे पर कुछ लगाम लगा दी थी। उन्होंने शहर के बड़े बरसाती नालों को ही ठेके पर सफाई करानी शुरू की थी। नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने छोटे नालों की सफाई तो नियमित कराने का निर्देश दे रखा है, परंतु बरसाती पानी की निकासी की जरूरत के हिसाब से तली झाड़ सफाई नहीं हो रही हैं। ऐसे में बरसात में समस्या हो सकती है। पार्षद कन्हैया खेवडिया का कहना है कि नाईसोता नाला, बेलदेई का नाला ठसाठस भरा हुआ है। इनकी समय पर सफाई नहीं होने पर हरकी पैड़ी, सुभाषघाट व गऊघाट में जलभराव होगा। दोनों चेकडैमों की भी सफाई होनी है। पूर्व सभासद अशोक शर्मा ने का कहना है कि लाटोवाली सहित कनखल के कई बड़े नालों को साफ करने की जरूरत है। पार्षद रवि धींगड़ा ने बताया कि ज्वालापुर बाजार को तो बिना बरसात के भी जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है और बरसात से पहले नालों की सफाई नहीं हुई तो बाजार में जलभराव होना तय है।
बरसात से पहले हमेशा ही नगर निगम की ओर से नालों की तली झाड़-सफाई कराई जाती है। नगर आयुक्त को तत्काल इसकी योजना बनाने को निर्देशित किया जा रहा है, ताकि किसी शहरवासियों को नालों की सफाई न होने से जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े। - मनोज गर्ग मेयर नगर निगम हरिद्वार