अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिस प्रकार नववर्ष शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होता है, उसी प्रकार पुरुषोत्तम मास भी शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होता है। इस बार पुरुषोत्तम मास 16 मई से शुरू होगा और 13 जून को समाप्त होगा। जहां तक दो महीने चलने वाले ज्येष्ठ मास का सवाल है, यह मास एक मई को शुरु होकर 28 जून तक चलने वाला है।
प्रत्येक संवत में बारह महीने पड़ते है। चौथे वर्ष जब पुरुषोत्तम मास आता है, तब एक महीना बढ़कर वर्ष के तेरह महीने हो जाता है। यह वर्ष भी अधिक मास का वर्ष है। प्रत्येक नवसंवत्सर शुक्ल पक्ष से शुरू होता है, उसी प्रकार अधिक मास में भी शुक्ल पक्ष पहले और कृष्ण पक्ष बाद में आते हैं। पुरुषोत्तम मास की विशेषता यह है कि यह मास संक्रांति विहीन है। गौरतलब है कि भगवान सूर्य नारायण प्रतिमास एक राशि में प्रवेश करते हैं। पुरुषोत्तम मास में कोई संक्रांति नहीं पड़ती। नतीजतन ज्येष्ठ मास लगने पर जो संक्रांति रहती है, पुरुषोत्तम मास में भी बनी रखेगी। वर्षों का यह प्राचीन गणित इस लिए भी सत्य है, चूंकि जिस वर्ष पुरुषोत्तम मास पडे़, उसी वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर होता है। लीप ईयर में फरवरी 29 दिनों की होती है। अंतर इतना है कि अंग्रेजी कैलेंडर में वर्ष का एक दिन बढ़ता है, जबकि देशी भारतीय कैलेंडर में पूरा एक महीना बढ़ जाता है। इस बढ़े महीने के कारण अधिक मास से पूर्व आने वाले पर्व जल्दी पड़ते है और अधिक मास के बाद के पर्व एक महीना विलंब से आते हैं। ज्येष्ठ का महीना बीतते ही पर्व एक महीना देर से आना शुरू हो जाएंगे। फिर अधिक मास का यह कैलेंडर उसी मुकाम पर पहुंच जाएगा।
पुरुषोत्तम मास में देश के सभी तीर्थ क्षेत्रों में भगवान विष्णु के निमित्त कार्यक्रम होते हैं। इनमें श्रीमद् भागवत कथाएं सबसे प्रमुख हैं। यही कारण है कि तीर्थ नगरी में वैशाख की कथाएं बहुत कम हो रही है। दर्जनों स्थानों पर पुरुषोत्तम मास में कथाओं का आयोजन किया जाएगा। धर्मनगरी में लाखों श्रद्धालुओं के महीन भर बने रहने केे देखते हुए धर्म क्षेत्र में व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। चूंकि इस महीने को भगवान विष्णु ने स्वयं अपना पुरुषोत्तम नाम दिया, अत: इस महीने विष्णु मंदिरों में भी खासी भीड़ रहेगी।