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जिला पंचायत सदस्य के लिए 861 नामांकन

Fri, 04 Dec 2015 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नामांकन के लिए अंतिम दिन जिला पंचायत कार्यालय में भारी भीड़ उमड़ी। जिला पंचायत सदस्य की 47 सीटों के लिए अंतिम दिन शुक्रवार को 491 नामांकन पत्र जमा किए गए। जबकि चार दिन तक चली नामांकन प्रक्रिया में कुल 861 दावेदारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। इन चार दिनों में 1216 नामांकन पत्र बिके। अधिकतर दावेदार ढोल-नगाड़ों के साथ पर्चा दाखिल करने पहुंचे। पूरे दिन कार्यालय परिसर और इसके आसपास पांव रखने तक की जगह नहीं रही। देर शाम तक मेले जैसे माहौल रहा।   
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दोपहर 12 बजे तक ही जिला पंचायत कार्यालय से सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय एवं आसपास की सड़कें भीड़ के चलते पूरी तरह पैक हो गई थी। नामांकन दाखिल करने वालों की सभी काउंटरों पर कतारें लगी रहीं। पत्नी रानी देवयानी का नामांकन पत्र दाखिल करवाने पहुंचे विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन समर्थकों के साथ घिरे रहे। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह अपनी पत्नी कुसुम देवी और छोटे भाई की पत्नी का नामांकन जमा करने पहुंचे। उनके साथ भी समर्थकों की भीड़ रही। कांग्रेस विधायक ममता राकेश अपने देवर सुबोध राकेश सहित अन्य समर्थकों का नामांकन पत्र जमा करने तक मौके पर डटी रहीं। भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद भी कार्यालय में शाम तक डटे रहे। इस दौरान कई समर्थक एक-दूसरे दावेदारों की भीड़ टोह लेते नजर आए। कार्यालय में भीड़ पहुंचने पर एक अतिरिक्त काउंटर खोला गया। इसके अलावा सिक्योरिटी जमा करने के लिए भी अतिरिक्त काउंटर की व्यवस्था की। पूरी नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्वक निपटी।
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पांच दिन तक होगी नामांकन पत्रों की जांच
जिला पंचायत सदस्य के लिए नामांकन होने के बाद अब शनिवार से पांच दिन तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। जिला पंचायत चुनाव अधिकारी एसएस शर्मा ने बताया कि आवेदन करने वालों के नामांकन पत्र दाखिल कर लिए गए हैं। नामांकन पत्रों की जांच पांच से नौ दिसंबर तक होगी। दस दिसंबर सुबह आठ बजे से तीन बजे तक नाम वापसी होगी। प्रतीक चिन्ह का आवंटन 11 दिसंबर को सुबह आठ बजे से कार्य समाप्ति तक होगा।
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इनसेट
कई के चेहरों पर खुशी तो कई मायूस
जिला पंचायत सदस्य के नामांकन दाखिल करने कई प्रत्याशी पार्टी से बगावत करके पहुंचे। उनके चेहरे पर पार्टी की ओर से नाम घोषित न करने का मलाल साफ दिख रहा था। ऐसे दावेदार ज्यादा कांग्रेस और बसपा से रहे। कई ने टिकट इस उम्मीद पर भी भरा है कि नाम वापसी के समय तक उन्हें पार्टी से समर्थन मिल सकता है। कई नाराज दावेदारों ने पार्टी के नेताओं से बातचीत करना तक मुनासिब नहीं समझा और नामांकन जमा कर समर्थकों के साथ निकलते बने।
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