ब्यूरो/अमर उजाला, पथरी
रानीमाजरा में सहकारी गेहूं खरीद केंद्र पर किसानों ने अनाज की घटतौली का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। व्यवस्था में सुधार नही होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। साथ ही किसानों ने खरीद केंद्र पर कम्प्यूटरीकृत कांटे से गेहूं की तौल कराने की मांग की।
बुधवार की सुबह क्षेत्र के महावीर, रमेश, रामपाल, बिजेंद्र और इकबाल आदि किसान गेहूं क्रय केंद्र पहुंचे। उनका आरोप था कि क्रय केंद्र पर जान बूझकर गेहूं की तौल बाट वाले कांटे से की जा रही है। हर तौल पर घटतौली की जा रही है, जिससे किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। कंप्यूटरीकृत कांटा लगाए जाने की मांग करते हुए उन्होंने केंद्र पर प्रदर्शन किया। मांग नहीं माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी। वहीं, क्रय खरीद केंद्र प्रभारी अश्वनी कुमार का कहना है कि कम्प्यूटरीकृत कांटा खराब हो गया है। इसलिए गेहूं की तौल बाट कांटा से की जा रही है। जल्दी ही इस व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने घटतौली के आरोपों को गलत बताया।
गेहूं बिक्री को पंजीकरण की लंबी प्रक्रिया से परेशानी
किसानों को सहकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर अनाज बेचने के लिए पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। क्षेत्र के 40 गांवों के किसान पहले सहकारी गेहूं खरीद केंद्र खुलने का इंतजार करते रहे है। अब रानीमाजरा में सहकारी गेहूं खरीद केंद्र खुल गया है। सहकारी गेहूं खरीद केंद्र पर अनाज बेचने के लिए किसानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
एक महीने से खेतों में गेहूं की फसल की कटाई चल रही है। तभी से किसान अधिकारियों से क्षेत्र में सहकारी गेहूं खरीद केंद्र खोलने की मांग उठाते रहे है। सरकार की ओर से अधिकारियों को एक अप्रैल से सहकारी गेहूं खरीद केंद्र खोलने के आदेश दिए गए थे। मोहित, बिजेंद्र, सुरेंद्र, सतीश, आरिफ आदि किसानों का कहना है कि पहले ही गेहूं की फसल की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलने से किसान परेशान है। सहकारी गेहूं खरीद केंद्र पर अनाज बेचने के लिए पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया के चलते तहसील के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि इस बार पहली बार किसानों को पंजीकरण किया जा रहा है, जिसमें किसानों से एक फार्म भरवाया जा रहा है। किसान से पूरी खेती और उसके बारे में अन्य विवरण विस्तार से मांगा जा रहा है। इस पर पहले हल्का लेखपाल और बाद में तहसीलदार की रिपोर्ट लगवानी पड़ती है। इस लंबी प्रकिया से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।