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कर्ज माफ न होने पर किसान दो अक्तूबर को घेरेंगे पीएम आवास

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हरिद्वार। भारतीय किसान यूनियन (अम्बावत) के तीन दिवसीय अधिवेशन के अंतिम दिन किसानों ने केंद्र सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने का एलान किया है। अधिवेशन के अंतिम दिन कई प्रस्ताव पारित किए गए। किसानों ने साफ किया कि जब तक केंद्र सरकार बैंक घोटाला करने वाले नीरव मोदी से वसूली नहीं कर पाती तब तक वह बैंकों का ऋण नहीं लौटाएंगे। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में दो अक्तूबर को गांधी जयंती के दिन प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने का निर्णय लिया।
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अलकनंदा होटल परिसर में अधिवेशन में किसानों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अम्बावत ने कहा कि किसानों की हालत मजदूर से भी बदत्तर होती जा रही है। हरिद्वार के साथ जहां-जहां गंगा के साथ अन्य नदियों में खनन हो रहा है, वहां के लोगों के साथ किसानों को भी काम नहीं दिया जा रहा है। किसान अपने खेत में खनन नहीं करा सकता है। रायल्टी में कोई हिस्सेदारी नहीं है। फसलों के भुगतान को आंदोलन करना पड़ रहा है। यदि अन्य आयोगों की तरह किसानों के लिए किसान आयोग बनाकर उसमें बजट का प्रावधान किया जाए तो इससे किसानों की स्थिति में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब किसानों की फसलों का बीमा किया जाता है और फसल के नष्ट होने के बाद कोई भी बीमित धनराशि उन्हें नहीं दी जाती है। गन्ना भुगतान का 22 हजार करोड़ रुपया बकाया है, लेकिन पाकिस्तान से चीनी मंगवाई जा रही है। किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था नहीं हैं। इलाज के लिए सरकारी कर्मचारी की तरह सुविधा हो तो बीमार किसान को इलाज मिल सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों का कर्ज बिना सशर्त के माफ किया जाए और किसानों पर लगे मुकदमें वापस हो। उपरोक्त सभी मांगे तीन महीने में पूरी नहीं हुई तो दो अक्तूबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने किसानों से घेराव की रणनीति बनाने को आह्वान किया। इस मौके पर अतर सिंह संधु, ललित त्यागी, अनिल चौधरी, पहल सिंह पंवार, राजदीप मैनवाल, सागर सिंह, चौधरी विपिन, गंगा प्रसाद यादव, नीरज चौधरी, लाल बहादुर यादव, पुष्पा धनगड़, गुरनाम सिंह, सुरेश कोथ, कंवरपाल चौधरी, राहुल गुर्जर, मदन, यशपाल प्रधान, अजीत सिंह कहलोम, जग्गी पहलवान, शमशेर सिंह दहिया, रुपेेश शुक्ला, कोमल रानी आदि शामिल हुए
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यूनियन के नाम पर कर रहे कुछ लोग अवैध उगाही
ऋषिपाल अंबावत ने कहा कि भाकियू 20 सालों से किसानों के हितों के लिए संघर्ष कर रही है और इस अवधि में कई संगठनों ने अलग होकर अपनी दुकान चलानी शुरू कर दी है। यूनियन के नाम से टोपी बिल्ला लगाकर लोगों को लूटने का काम कर रहे हैं, जिसे कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने लोगों को ऐसेे व्यक्तियों के प्रलोभन में न आने की बात कही। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान के नाम पर लूट खसोट नहीं होनी चाहिए।
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आरके त्यागी को यूनियन से बाहर किया
रुड़की निवासी एवं यूनियन के प्रवक्ता आरके त्यागी को भाकियू से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता अतर सिंह संधु ने बताया कि यूनियन में इनका कोई योगदान नहीं रहा और यूनियन के नाम पर चोर बाजारी की जा रही थी। त्यागी परिवार के अवैध तरीके से खनन आदि के कामों में लिप्त होने से यूनियन की बदनामी हो रही थी। उन्होंने अन्य लोगों को भी आगाह किया कि यदि किसी ने यूनियन के नाम का दुरुपयोग किया तो उसे भी बाहर कर दिया जाएगा।
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