रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
सब कुछ ठीक रहा तो हरिद्वार में बायोगैस से सीएनजी का उत्पादन दिसंबर से शुरू हो जाएगा। सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों के लिए हरिद्वार से प्रतिमाह एक लाख किलो सीएनजी मिलेगी। इससे बायोगैस को जलाने से पर्यावरणीय क्षति में आने वाली कमी से ग्रीन हाउस पर पड़ने वाले नकारात्मक असर में कमी आएगी।
अनुरक्षण शाखा उत्तराखंड जल संस्थान ने इसके लिए उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के इनारोविक एनर्जी के साथ सात साल के लिए अनुबंध किया है। एक मई से अनुबंध पर काम शुरू हो गया है। कंपनी बायोगैस को एलपीजी की भांति सीएनजी में परिवर्तित करने के प्लांट पर चार से पांच करोड़ रुपये खर्च करेगी। नौ महीने में पूरी परियोजना तैयार हो जाएगी, जबकि सीएनजी का उत्पादन दिसंबर में शुरू होगा। बायोगैस के बदले में कंपनी सात साल में कम से कम 1.51 करोड़ 47 हजार रुपये अनुरक्षण इकाई को देगी। अनुरक्षण इकाई के जगजीतपुर स्थित सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) से प्रतिदिन 500 क्यूबिक लीटर बायोगैस निकलती है, जबकि इसकी क्षमता 2000 क्यूबिक लीटर प्रतिदिन है। पिछले 27 साल से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पैदा होने वाली बायोगैस को जलाया जा रहा था, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा था। अब बायोगैस को सीएनजी में परिवर्तित करने की परियोजना से शुरू होने से प्रदूषण रोकने में मदद मिलने के साथ ही अनुरक्षण इकाई को राजस्व भी प्राप्त होगा और गाड़ियों के लिए सीएनजी प्राप्त होगा।
बायोगैस को सीएनजी में परिवर्तित करने से ग्रीन हाउस पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव में कमी आएगी। इससे एनर्जी सेविंग के राष्ट्रीय कार्यक्रम में भी मदद मिलेगी। बायोगैस से जो सीएनजी बनेगी उसकी मार्केटिंग अनुबंधित कंपनी करेगी। एक मई से नई शुरूआत हो गई है और दिसंबर तक सीएनजी का उत्पादन हरिद्वार में शुरू हो जाएगा।
- अजय कुमार, अधिशासी अभियंता अनुरक्षण इकाई जल संस्थान हरिद्वार।