हरिद्वार।
शनिवार को पंचपुरी के अधिकांश भागों में दुर्गाष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। दस बजे के बाद अष्टमी तिथि लग जाने पर घर-घर कन्या भोज आयोजित हुए। देवी पाठों का समापन करते हुए अष्टमी के यज्ञ भी कराए गए। रविवार को कईं लोग अष्टमी और नवमी एक साथ मनाएंगे। इसी दिन रामजन्मोत्सव का पर्व भी मनाया जाएगा।
नवरात्र का मुख्य पर्व अष्टमी माना जाता है। सप्तमी कालरात्रि तिथि सवेरे दस बजे तक विद्यमान थी। उसके बाद दुर्गाष्टमी के पर्व घर-घर तथा आश्रमों में मनाए गए। अनेक स्थानों पर कन्या भोजों का आयोजन सामूहिक रूप से किया गया। देवी भागवत के पाठों का समापन उन भक्तों ने किया जो अष्टमी को ही नवरात्र समाप्त मान लेते हैं। पंचपुरी के अधिकांश भागों में अष्टमी के संकीर्तन भी सायंकाल आयोजित किए गए। माया देवी, मंशा देवी और चंडी देवी मंदिरों में भोजों का आयोजन हुआ। सुरेश्वरी देवी मंदिर में भंडारे का आयोजन रविवार को किया जाएगा। भगवती दुर्गा की विशेष आरती सायंकाल सभी पौराणिक मंदिरों में उतारी गई। मायादेवी पर प्रवचन करते हुए श्रीमहंत हरि गिरि, प्रेम गिरि, देवानंद सरस्वती, मनोहर पुरी आदि ने मां के महत्व पर प्रकाश डाला। सभी पौराणिक मंदिरों में भगवती का भव्य श्रंगार किया गया। मायादेवी प्रांगण में कन्याओं का पूजन रविवार को किया जाएगा। अनेक मंदिरों में फल और शाक सब्जियों से दुर्गा का श्रृंगार हुआ। रामनवमी की समस्त कथाओं का समापन रविवार को होगा। नवमी के भोज भी इसी दिन आयोजित किए जाएंगे।
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बेकल की 61 वीं कृति का विमोचन आज
हरिद्वार। हरिद्वार के प्रसिद्ध साहित्यकार और कवि डा. ताराचंद पाल बेकल की 61 वीं पुस्तक ललकारता आइना का विमोचन रविवार को समारोह पूर्वक किया जाएगा। डा. बेकल हरिद्वार के ही नहीं देश के जाने माने साहित्यकार है। उनकी इस काव्य पुस्तक में देश के वीरों और शहीदों का गुणगान किया गया है। विमोचन समारोह में केंद्र और उत्तर प्रदेश के कई मंत्री भी शामिल हो रहे हैं। लोकार्पण दिल्ली के इंद्रापुरम सामुदायिक केंद्र में आयोजित समारोह में होगा।