अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
समय के साथ हरिद्वार शहर का चेहरा भी बदल रहा है। कभी मंदिरों, धर्मशालाओं और कलकल बहती गंगा की पहचान वाली कुंभनगरी ने भी आधुनिकता की चादर ओढ़ ली है। धर्मशालाओं की जगह आलीशान होटलों ने ले ली है। दुकानों की संख्या बढ़ने से सड़कें तंग हो गई हैं। ऐसे में बस अड्डे के साथ ही कुंभ सहित धर्मनगरी में होने वाले लक्खी मेलों और स्नान पर्वों का शहर से बाहर तक विस्तार किया जा रहा है।ं अंतररराष्ट्रीय बस अड्डा (आईएसबीटी) का निर्माण ट्रांसपोर्ट नगर सराय शिफ्ट ं करने और नमामि गंगे मिशन में मुख्य गंगा नदी की नीलधारा (चंडीघाट) में 700 मीटर लंबा शानदार स्नानघाट के निर्माण को इसी नजरिये से देखा जा रहा है।
अनियोजित अंधाधुंध निर्माणों से संकरी हो गए सड़कें और आश्रमों, अखाड़ों के अंदर मेलों व धार्मिक आयोजनों की खाली भूमि पर बहुमंजिले कंक्रीट के जंगल खड़े होने से प्रशासन को मेलों की व्यवस्था बनाने में अब परेशानी का सामान करना पड़ रहा है।
मेलों में लगने वाले जाम तथा पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से शासन-प्रशासन की देशभर में छवि धूमिल हो रही है। ऐसे में अब धीरे-धीरे बिना शोरशराबे के मेलों की भीड़ को शहर से बाहर रखने की योजना पर अमल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा (आईएसबीटी) का निर्माण ट्रांसपोर्ट नगर सराय में किया जा रहा है। इसके साथ की नमामि गंगे मिशन में मुख्य गंगा नदी की नीलधारा (चंडीघाट) में 700 मीटर लंबा शानदार स्नानघाट का निर्माण हो रहा है। कुंभ मेला 2010 की योजना में भी नीलधारा में काली मंदिर क्षेत्र में सिंचाई विभाग ने बड़ा स्नानघाट का निर्माण कराया था। नमामि गंगे मिशन में जो स्नानघाट वर्तमान में बनाया जा रहा है वह मुख्य रूप से कुंभ-अर्द्धकुंभ के साथ कांवड़ मेला व स्नान पर्वों की भीड़ के उद्देश्य से किया जा रहा है। नमामि गंगे में चंडीघाट में वाहन पार्किंग के साथ ही मेला आयोजनों के मद्देनजर मूलभूत सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।