हरिद्वार।
करीब दो महीने बंद रहने के बाद विवाहों को सीजन अब एक बार फिर से शुरू हो रहा है। दो फरवरी को लंबे अरसे के बाद शुक्रोदय हो जाएगा। शुक्र के उदय होते ही विवाह कार्यों में तेजी आने वाली है। जहां तक दूसरे शुभ ग्रह गुरु का सवाल है, वे पहले ही उदित हैं।
पौष मास को खर मास भी कहा गया है। परिणाम स्वरूप इस महीने में विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद रहते हैं। शुक्रोदय न होने से माघ का पूरा महीना भी विवाह रहित चला गया। अब दो फरवरी को मघा नक्षत्र में शुक्रोदय हो रहा है। शुक्रदेव के दिखाई पड़ने के बाद सभी प्रकार के रुके हुए मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। मुख्य रूप से शुक्रास्त होने पर विवाह बंद रहते है। शास्त्रीय दृष्टि से बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं और शुक्र दैत्यों के गुरु। इसके बावजूद भारतीय विवाह और मांगलिक परंपरा में दोनों आचार्यों का रहना जरूरी है। कई मायनों में गुरु के अस्त रहते मांगलिक कार्य होते हैं, किंतु शुक्र के अस्त रहने पर ये कार्य चलते रहते हैं। अब वर्तमान संवतसर में कोई भी अस्त नहीं होगा। परिणाम स्वरूप विवाहों का मांगलिक सीजन केवल होलाष्टकों के आठ दिनों तक बंद रहने के बाद लगातार चलता रहेेगा। इस बार होली का पर्व एक मार्च को पड़ रहा है। 23 फरवरी को होलाष्टक लग जाएंगे। उस समय विवाहों पर एक बार फिर आठ दिनों के लिए विराम लग जाएगा। रंगों भरा फाग निपटते ही विवाह अगले दिन से फिर शुरू हो जाएंगे।