हरिद्वार।
उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। बड़ी संख्या में विकास भवन पहुंचे कर्मचारियों ने अपनी ताकत का अहसास कराते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन किया जाएगा। जिलाधिकारी दीपक रावत ने धरना स्थल पर पहुंचकर ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
शुक्रवार को उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के बैनर तले राज्य के 23 परिसंघों के पदाधिकारी और सदस्य रोशनाबाद स्थित विकास भवन के सामने पार्किंग मैदान में एकत्र हुए। इस मौके पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त मोर्चा के संयोजक राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि 15 मई को शासन ने उनकी मांगों पर चर्चा की, लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। जिसके चलते 18 मई को धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह सांकेतिक धरना है, यदि उनकी मांगों पर शासन कोई कार्रवाई नहीं करता है तो अगली बार सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने को वह तैयार हैं। इस मौके पर अशोक टंडन, नीता अधिकारी, अनिल कुमार, पवन रावत, कावेरी शर्मा, मंजीता पंवार, सचिन कुमार, ताजवीर सिंह रावत, सुरेंद्र सिंह रावत, विवेक सैनी, इंद्रजीत सिंह, विजेता, सूरज सिंह, जव्वाद अली, जावेद अली, सत्यवीर सिंह, अमित कौशिक, मनोज शर्मा, सुरजीत सिंह, देवेंद्र सिंह बिष्ट, उपेंद्र लाल, विकास सिंह, जोंगेंद्र सिंह, मुलायम सिंह, जयराज सिंह नेगी, खुशीराम, राजपाल सिंह, अरविंद कुमार, धर्मपाल, अनिल कुमार जैन, मदनलाल श्रीवास्तव, संदीप कुमार, सुमंत कुमार, पुष्पा सैनी, संजीव कश्यप, विवेक सैनी, सचिन कुमार आदि शामिल हुए।
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नहीं निकाल पाए रैली
धरने के दौरान सभी कर्मचारियों ने निर्णय लिया कि दोपहर एक बजे मैदान से कलेक्ट्रेट कार्यालय तक रैली निकालेंगे। इसकी तैयारी चल रही थी। करीब साढ़े 12 बजे जिलाधिकारी धरने स्थल पर कर्मचारियों के बीच में पहुंच गए। जिलाधिकारी दीपक रावत ने उनकी मांगें सुनी और वहीं पर ज्ञापन लिया।
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ये हैं संयुक्त मोर्चा की मांगे
- शिक्षकों कर्मचारियों को सेवाकाल में उत्तराखंड शासन के कार्मिक विभाग की ओर से जारी नियमावली के अंतर्गत तीन पदोन्नति स्वीकृत की जाए या तीन एससीपी का लाभ दिया जाए।
- 4600 ग्रेड वेतन प्राप्त सभी शिक्षकों को रुपये 17,140 मूल वेतन अनुमन्य कर संवर्गीय वेतन विसंगति दूर की जाए। पूर्व एसीसी 10,16, 26 वर्ष की सेवा में पदोन्नति के साथ कार्मिकों को दी जाए एवं ऊर्जा निगम के कार्मिकों को 9, 14, 19 वर्ष पर एसीपी का लाभ दिया जाए।
- चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों को एसीपी के अंतर्गत ग्रेड पे 4600 दिया जाए और ढांचे में मृत घोषित किए गए सभी पदों को पुनर्जीवित किया जाए।
- सातवें वेतनमान की संस्तुतियों के अंतर्गत समस्त भत्तों का लाभ दिया जाएं एवं डीए का भुगतान किया हो। - सार्वजनिक निगमों, उपक्रमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं जिन्हें सातवें वेतनमान के अंतर्गत एरियर का भुगतान नहीं किया गया है, इन सभी को एरियर का भुगतान किया जाए।
- यू हेल्थ कार्ड योजना का लाभ सभी कार्मिकों को एक साथ प्रदान किया जाए।
- दैनिक वेतन, संविदा, आउटसोर्स के कर्मचारियों के संबंध में 17 अप्रैल को पत्रांक 111 के आदेश को निरस्त किया जाए और संबंधित कर्मचारियों को नियमित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार समान कार्य एवं न्यूनतम वेतन 15, 18, 21, 24, 28 हजार प्रतिमाह दिया जाए।
- स्थानांतरण एक्ट में पुरुष कर्मचारियों को 52 वर्ष एवं महिला कर्मचारियों को 50 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर स्थानांतरण एक्ट से मुक्त किया जाए।
- श्रीयूत इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में गठित वेतन समिति को भंग किया जाए तथा पूर्व की भांति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वेतन विसंगतियों का निराकरण कराया जाए।
- पूर्व की भांति स्थलीकरण की व्यवस्था को बहाल किया जाए तथा समस्त कार्मिकों को 1200 वाहन भत्ता दिया जाए।
- विभिन्न विभागों के ढांचे में वेतन समिति की पदों में कटौती के प्रस्ताव को खारिज किया जाए।