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आज से शुरू हो जाएगा महीने भर चलने वाला पुरुषोतम मास

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पर्व विहीन और संक्राति विहीन पुरुषोत्तम मास बुधवार से शुरू हो रहा है। इस मास का समापन 13 जून को होगा। पुरुषोत्तम मास में अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। अलबत्ता यह महीना पर्व विहीन है। इस महीने केवल गंगा दशहरे का ही पर्व पड़ता है।
पुरुषोत्तम मास प्रत्येक चौथे साल आने वाला ऐसा मास है, जिसमें संक्रांति नहीं पड़ती। याद रहे कि सूर्य प्रत्येक मास एक राशि में प्रवेश करते हैं। अब इस पूरे महीने सूर्य का राशि में प्रवेश नहीं होगा। जिस राशि में वर्तमान में सूर्य चल रहे हैं, उसमें ही चलते रहेंगे। इसका कारण इस महीने संक्रांति का लोप होता है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार जिस महीने सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश न करें, उसे अधिकमास कहते हैं। इसका कारण यह है कि हमारा कैलेंडर चांद वर्ष और सौर मास दोनों से चलता है। चंद्रमा से गति से नापे जाने वाला चंद्र कैलेंडर 354 दिन का है। जबकि सौरमास 365 दिन का है। प्रत्येक वर्ष दोनों मासों के बीच में 11 दिन का अंतर पड़ जाता है। तीन वर्ष में यह अंतर तीस दिनों से अधिक का हो जाता है। परिणाम स्वरूप ऋषि मुनियों ने इस महीने को अधिक मास नाम दिया। बाद में नारायण ने अपना नाम पुरुषोत्तम नाम दे दिया। चौथे वर्ष चंद्र और सौर दोनों कैलेंडर एक साथ चल पड़ते हैं। इस प्रकार अधिक मास की अवधि 28 दिन से 36 दिन हो सकती है। इस मास को मलमास भी कहा जाता है।
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पुरुषोत्तम मास में विवाह आदि शुभ कार्य, नामकरण, यज्ञोपवीत संस्कार आदि नहीं पड़ते। केवल गंगा आगमन की तिथि गंगा दशहरा ही मनाया जाएगा। दशहरे के अगले दिन आने वाली निर्जला एकादशी एक महीने बाद मनेगी। इस मास में दंड मूल शांति, अन्नप्राशन, जन्मदिन आदि के कार्य चलते रहते हैं। धर्मनगरी में पुरुषोत्तम मास मनाने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्र से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है।
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