हरिद्वार।
भगवान राम जन्मोत्सव का पर्व रामनवमी धर्मनगरी में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। घरों में भगवान राम की पूजा अर्चना की गई और अनेक जगह चल रही राम कथाओं का समापन हुए। अष्टमी और नवमी के यज्ञ और भंडारे संपन्न हुए।
जिन आश्रमों और मंदिरों में भगवान राम विराजमान हैं, वहां श्रद्धालुओं का आवागमन दिनभर चलता रहा। तुलसीमानस मंदिर के राम मंदिर में राम संकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया। ज्वालापुर के रघुनाथ मंदिर में चल रही कथावार्ता संपन्न हुई। इस प्रकार रामलीला मैदान में नौ दिन के मानसपाठ और रामकथा का समापन हुए। रामनवमी के अवसर पर घरों में भगवान राम के सामने भोग लगाकर घरवालों ने अन्न जल ग्रहण किया। इसी प्रकार कुछ भागों में दुर्गा अष्टमी आज मनाई गई। कन्याओं को भोजकर कराकर नौ दिनों के पाठों का समान कईं जगह हुआ। मनसा देवी और चंडी देवी में यज्ञ संपन्न हुए। मायादेवी में विशेष आरती का आयोजन दिन के समय किया गया। सुरेश्वरी देवी के मंदिर में शतचंडी यज्ञ के आयोजन के बाद विशाल भंडारा आयोजि हुए। ऐसे ही भंडारे अन्य स्थानों पर भी आयोजित किए गए। इसी के साथ नवरात्र और रामनवमी के पर्व संपन्न हो गए।
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कन्या पूजन मां भगवती की पूजा के समान
हरिद्वार। श्री दक्षिण काली मंदिर में नौ दिन से चल रहे नवरात्र पर रविवार को नवमी के दिन 108 कन्याओं का पूजन किया गया। सभी कन्याओं को स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने लाल चुनरी ओढ़ाकर उनके चरण धोकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि संसार में 52 पीठों में से दक्षिण काली मंदिर एक अद्भुत शक्ति पीठ मानी जाती है। इस मंदिर में हर मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने कहा कि नवरात्र में मां के सभी नौ स्वरूपों का पूजन विधि विधान के साथ करना चाहिये। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल को लंदन में भारत गौरव रत्न से सम्मानित करने के लिए मुझे बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति की अद्भुत पहचान को बनाने में संत महापुरूषों का अनुकरणीय योगदान है। जिसके चलते विदेशो में भी सनातन परम्पराओं से प्रभावित विदेशी हो रहे है। इस अवसर पर स्वामी शिवानन्द, स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी सत्यव्रतानंद, स्वामी आशुतोष पुरी, स्वामी शिवम पुरी त्रिकालदर्शी, आदि सन्तों महंतो एवं सतीश बंसल, राजेश गुप्ता, सुरेन्द्र बंसल, समाजसेवी अजय कुमार ‘कुमार’ समाजसेवी गिरिश सहगल हजारों श्रद्धालु भक्तों ने कन्या पूजन कर आशीर्वाद लिया।