ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
एक तरफ एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से गंगा में खनन पर लगाई गई रोक सरकार और खनन व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा है। दूसरी ओर खनन पर लगी रोक प्रवासी पक्षियों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीते वर्षों की अपेक्षा इस बार प्रवासी पक्षियों की संख्या में इजाफा हुआ और हरिद्वार में अधिक समय पर प्रवास भी किया। इसे मातृसदन के अथक प्रयासों का परिणाम भी माना जा रहा है।
गंगा में बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर टापुओं को नष्ट कर दिया गया था। साथ ही खनन होने से प्रवासी पक्षियों के प्रवास स्थालों में विघ्न डाला जाता रहा। वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान भी भीमगोड़ा बैराज में प्रवासी पक्षियों के ठहरने का टापू बह गया था। मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से प्रवासी पक्षी असुरक्षित महसूस करने लगे और उनकी संख्या में कमी आने लगी। खनन से गंगा को हो रहे नुकसान के खिलाफ मातसृदन ने प्रमुखता से आवाज उठाई। नतीजतन एनजीटी ने तीन वर्ष पहले ही हरिद्वार में खनन पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी एनजीटी के आदेश को कायम रखा।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट के 11 वर्षों के अध्ययन में खनन पर रोक लगने का सकारात्मक परिणाम सामने आया। अध्ययन में पाया गया कि मानवीय हस्तक्षेप कम होने से हुआ। जिससे प्रवासी पक्षी गंगा के तटों पर सुरक्षित महसूस करने लगे। पक्षी पहले की अपेक्षा अधिक समय हरिद्वार में व्यतीत कर रहे हैं, जो की पक्षियों के संरक्षण की दृष्टि से सकारात्मक संदेश है। हरिद्वार में भीमगोड़ा बैराज, मिस्सरपुर पशुलोक बैराज सहित राजाजी टाइगर रिजर्व के कई स्थानों और गंगा घाटों पर प्रवासी पक्षी पहले की अपेक्षा इस वर्ष अधिक आए हैं।
अध्ययन के दौरान पाया गया कि खनन पर रोक लगने से विघ्न कम हुआ है और पक्षी सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इससे उनकी संख्या में पहले की अपेक्षा इजाफा हुआ है। कई पक्षी अभी हरिद्वार में ही हैं। ये मातृसदन के अथक प्रयासों के बाद ही संभव हो सका है।
- प्रो. दिनेश भट्ट, अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक, गुरुकुल कांगड़ी विवि
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि खनन पर रोक लगना केवल प्रवासी पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि जीव जंतु सहित पूरे पर्यावरण के लिए लाभदायक है। लेकिन प्रशासन और सरकार का ध्यान खनन के दुष्प्रभावों की ओर नहीं जा रहा है और गंगा के संरक्षण की कोई सुध नहीं ले रहा है।
- स्वामी शिवानंद सरस्वती, परमाध्यक्ष, मातृसदन