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शासन ने नगर निगम को दिया बड़ा झटका

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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शहरी विकास विभाग ने नगर निगम को बड़ा झटका दिया है। अप्रैल 2012 के तत्कालीन प्रशासक सचिन कुर्वे के उस निर्णय को पलट दिया है जिसमें नगर निगम की आय बढ़ाने के मद्देनजर दुकानों का किराया बाजार दर (सर्किल रेट) से निर्धारित करने का आदेश दिया था। प्रशासक के निर्णय के बाद लगभग 60 प्रतिशत दुकानदार सर्किल रेट से किराया अदा करते आ रहे हैं। केवल रसूखदार दुकानदार विरोध करते हुए किराया जमा नहीं करा रहे हैं।
भाजपा के नगर निगम बोर्ड ने चहेते दुकानदारों से मिलीभगत कर जून 2015 में तत्कालीन प्रशासक के सर्किल रेट से किराया निर्धारित करने के स्थान पर न्यूनतम किराया प्रतिमाह 500 रुपये या वर्तमान किराये का दुगुना करने का प्रस्ताव पारित किया था। प्रशासक के निर्णय के खिलाफ पारित बोर्ड के इस प्रस्ताव को शहरी विकास निदेशालय ने वीटो करते हुए सर्किल रेट के निर्णय को बनाए रखा था। सर्किल रेट से किराया निर्धारित होने से नगर निगम की आय में लाखों रुपये की वृद्धि हुई थी। अब शहरी विकास विभाग की बैठक का कार्यवृत (मिनट्स) नगर निगम को प्राप्त हुआ है, जिसमें दुकानों का किराया न्यूनतम 500 रुपये और वर्तमान किराये का दोगुना में से जो भी अधिक हो लिया जाएगा। शासन के नए निर्णय से नगर निगम प्रशासन को यह नहीं सूझ रहा है कि किस निर्णय का पालन करें। यदि शासन के नए निर्णय को लागू करने का आदेश आता है तो उसको प्रतिमाह लाखों रुपये की चपत लगनी तय है। नगर निगम की पहले चली आ रही माली स्थिति पर यह एक और बड़ी चोट साबित होगी। नगर निगम की शहर में 400 से अधिक दुकानें हैं।
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2018 की बैठक का कार्यवृत पर उठ रहे सवाल
नगर निगम को जो कार्यवृत (मिनट्स) प्राप्त हुआ है। वह 19 जुलाई 2018 की बैठक का है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रमुख सचिव न्याय मीना तिवारी, शहरी विकास सचिव आरके सुधांशु सहित शहरी विकास निदेशालय के अधिकारियों के अलावा तत्कालीन नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया शामिल हुए थे। नगर आयुक्त दुकानों के किराया वृद्धि के तत्कालीन प्रशासक के निर्णय को उत्तर प्रदेश शासन के स्थानीय निकायों की आय बढ़ोतरी के संबंध में 1997 के शासनादेश का हवाला दिया था। बैठक में यह भी बताया गया था कि बाजार दर की किराया वृद्धि का विरोध होने पर प्रशासक ने बाजार दर के किराये में 15 प्रतिशत छूट दे दी थी। जुलाई की बैठक का कार्यवृत छह महीने बाद आने पर सवाल उठाया जा रहा है।
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अभी शहरी विकास विभाग की बैठक का कार्यवृत ही आया है। शासन के निर्णय को लागू करने के लिए शासनादेश जारी होता है जो अभी तक नहीं हुआ। इसलिए अभी कौन सा निर्णय लागू होगा तय नहीं है। जब तक नया आदेश नहीं आता है तब तक वर्तमान में जो स्थिति वही मान्य रहेगी।
- आलोक कुमार पांडेय, नगर आयुक्त
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