अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। प्रेमनगर आश्रम बनाम तत्कालीन मेयर मनोज गर्ग पक्ष के बीच हुए बवाल के बाद दर्ज क्रॉस एफआईआर अब भी हवा में झूल रही है। दोनों पक्षों का भाजपा से जुड़े होने से पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के मूड में नहीं दिख रही है।
पिछले साल दस अगस्त को तत्कालीन मेयर मनोज गर्ग ने बरसात के पानी की निकासी के नाम पर प्रेमनगर आश्रम की चाहरदीवारी गिरवा दी थी। तब प्रेमनगर आश्रम के सेवकों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया था। लाठी- डंडों से हमला करने पर मनोज गर्ग घायल हो गए थे। तब गर्ग के पक्ष में उतरे सफाईकर्मियों ने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रेमनगर आश्रम के मुख्य गेट को कूड़े से पाट डाला था। बात इतनी बिगड़ी थी कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मोबाइल फोन पर हुई बातचीत के बाद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज माने थे। इस दौरान प्रेमनगर आश्रम प्रबंधन और मेयर पक्ष ने एक- दूसरे के खिलाफ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पिछले वर्ष ही सितंबर माह में ज्वालापुर पुलिस ने दोनों पक्ष के मुकदमे की जांच विशेष जांच प्रकोष्ठ को सौंप दी थी, लेकिन अब तक जांच का कुछ अता- पता नहीं है। दोनों पक्ष भाजपा के ही हैं और प्रदेश में उनकी सरकार है। लिहाजा पुलिस जांच पर कुंडली मारे बैठी है। एसएसआई संजीव थपलियाल ने बताया कि जांच अभी एसआईएस में लंबित है।