ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
नगर निगम की कंपनी केआरएल पॉलिथीनयुक्त कचरा जलाकर हवा में जहर घोल रहा है। तीन साल से चंडीघाट से उठाकर ट्रंचिंग ग्राउंड सराय में डाला गया कचरा अब तक खुले मैदान मेें पड़ा सुलग रहा है।
सराय गांव के लोग कई बार कूड़ा जलाने के विरोध में प्रदर्शन कर चुके हैं। एनजीटी में भी शिकायत की थी। सुप्रीमकोर्ट ने किसी प्रकार का कूड़ा कचरा जलाने पर न केवल प्रतिबंध लगा रखा है बल्कि इसे अपराध की श्रेणी में घोषित किया है। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) गंगा नदी के किनारे चंडीघाट में शहर का कूड़ा डालने पर रोक लगा दी थी। कचरे का निस्तारण करने के आदेश दिया है। अर्द्धकुंभ मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने नगर निगम पर दबाव बनाया तो उसने आननफानन में हजारों मीट्रिक टन कचरा ट्रकों से भरवाकर सराय में डलवा दिया था। केआरएल को कचरे की छटाई और लैंडफिल का काम करना था, जो अब तक नहीं किया जा सका।
केआरएल के नए निदेशक हरेंद्र गर्ग का कहना है कि केआरएल के अनुबंध में सुरक्षा के दृष्टिगत ट्रंचिंग ग्राउंड में फायर सर्विस स्टेशन नगर निगम को बनाना है, लेकिन वह कूड़ा उठाने का पैसा भी समय पर नहीं दे रही है। कंपनी कंपोस्ट प्लांट की क्षमता भी जितना कूड़ा कचरा जनरेट हो रहा है, उससे काफी कम है।
मैं अभी केआरएल से आग बुझाने के लिए कहता हूं। फायर-फायटर की व्यवस्था केआरएल को करनी है। कूड़े से मिथेन गैस निकलती है। पुराने कूड़े कचरे में पुरानी बैटरियों का कचरा, प्लास्टिक और रसायन मिला होता है जो जल्दी आग पकड़ लेता है।
- डॉ. कैलाश गुंज्याल, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम