ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
श्री जयराम आश्रम में आयोजित संत सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि परिवारों में अच्छे संस्कार संत महापुरुषों के आशीर्वाद से ही प्राप्त होते हैं। संत ही गुरु के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देकर अपने शिष्यों और भक्तों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार धर्मनगरी की पहचान संतों से ही जानी जाती है। संत समाज लगातार श्रद्धालु को धार्मिक गतिविधियों से अवगत कराता है। भक्ति का मार्ग प्रशस्त कर भक्तों का कल्याण करने में संतों की निर्णायक भूमिका है। जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि शिक्षा संस्कार से ही परिवारों का कल्याण होता है। देवभूमि से गंगा निकलती है। वह भक्तों का अवश्य कल्याण करती है। समाजसेवा से ही ईश्वरीय भक्ति प्राप्त की जा सकती है। पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गुरुओं के आशीर्वाद से ही श्रद्धालु भक्तों का कल्याण होता है। महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गोसेवा, भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार, गरीब असहाय निर्धन परिवारों की मदद करना इनकी अच्छी कार्यशैली को दर्शाता है। इस दौरान उपस्थित संतों ने स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की दीर्घायु की कामना की। इस मौके पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने भी आश्रम पहुंचकर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी, श्रीमहंत रामरतन गिरि, महंत जसविंद्र सिंह, महंत कमलजीत सिंह, संत जगजीत सिंह, पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, महंत देवानंद सरस्वती, स्वामी सत्यव्रतानंद, स्वामी प्रबोधानंद गिरि, महंत गंगादास उदासीन, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, श्रीमहंत विनोद गिरि, स्वामी जगदीशानंद, महंत गंगादास उदासीन आदि मौजूद रहे। संत सम्मेलन का संचालन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने किया।
ब्रह्मस्वरुप सूझबूझ के व्यक्तित्व के धनी : राजराजेश्वराश्रम
जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी को आश्रम पहुंचकर आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी एक अत्यंत सूझबूझ के व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं। शंकराचार्य ने कहा कि ब्रह्मचारी संस्थाओं को लेकर गंभीर हैं और इससे उनके पुरुषार्थ का पता चलता है। उन्होंने कहा कि भौतिकता के इस समय में समाज को नई दशा और दिशा देने वाले धार्मिक व्यक्तियों की जरूरत है। उन्होंने संत समाज की परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए जीवन समर्पित करने वाले ब्रह्मचारी की दीर्घायु के लिए कामना की।