फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धर्मनगरी में पहुंची भारी भीड

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

हरिद्वार।
चार दिनों तक होने वाले स्नान पर्वों के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचने लगा है। हर साल 13 अप्रैल को होने वाला बैशाखी के स्नान के लिए श्रद्धालु बृहस्पतिवार को ही पहुंच गए, लेकिन ग्रह नक्षत्राें के हिसाब से इस बार वैशाखी का पुण्य काल और मेष संक्रांति 14 अप्रैल को ही पड़ रहा है।
जानकारों के अनुसार बैशाखी का पर्व शुरू तो बृहस्पतिवार से ही हो जाएगा, लेकिन 14 अप्रैल को प्रात: 8.10 बजे सूर्य नारायण अश्विन नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, तब गंगा स्नान करने से अनेक पुण्यदायी योग स्नानार्थियों को मिलते हैं। इस बार मेष संक्रांति का महत्व इस लिए भी अधिक बढ़ गया है, क्योंकि यह संक्रांति और सोमवती अमावस्या एक दिन के अंतराल से पड़ रहे हैं। यह स्नान भी 13 जनवरी को होने वाले लोहड़ी स्नान की तरह 13 अप्रैल को पड़ता है। इस बार विशेषता यह है कि मेष संक्रांति और बैशाखी एक साथ 14 अप्रैल को पड़ रहे हैं। जो श्रद्धालु परंपरा के अनुसार 13 अप्रैल को ही स्नान करते हैं, वे भी इस बार 16 की सोमवती तक रुके रहेंगे। 14 अप्रैल को जब बैशाखी और संक्रांति का स्नान प्रारंभ होगा, तब धूमाक्ष योग बनेगा। चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जो वर्ष की अंतिम राशि है। इसके विपरीत सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि सौर वर्ष की पहली राशि है। इस संक्रमण का पुण्यकाल सवेरे 8.10 बजे तब प्रारंभ होगा, जब सूर्य अश्विन नक्षत्र में आ जाएंगे।
विज्ञापन

---------------------------
आश्रम और धर्मशाला हुए पैक
धर्मनगरी के संत बाहुल्य उत्तरी हरिद्वार और कनखल के आश्रमों, मठों और अखाड़ों में धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। अधिकांश आश्रम और धर्मशालाएं श्रद्धालुओं की भीड़ से पैक हो गए हैं। बृहस्पतिवार को हरकी पैड़ी पर हुई गंगा आरती में भी भारी भीड़ उमड़ी।
विज्ञापन

---------------------
अनेक शुभ कार्य कराने की परंपरा है संक्रांति पर
हरिद्वार। संक्रांति के पुण्यकाल में आने वाले तीर्थ यात्री स्नान के बाद मुंडन, यज्ञोपवीत, कर्ण छेदन आदि संस्कार भी संपन्न कराएंगे। बैशाख में सूर्य के राशि परिवर्तन करने से सूर्य से असीमित ऊर्जा निकलती है। वर्ष में 12 बार सूर्य का संक्रमण राशियों में होता है, लेकिन मेष की संक्रांति मित्र योग भी बनाती है। इस योग और धूमाक्ष योग के साथ आने से गंगा स्नान का महत्व और भी बढ़ गया है। हरकी पैड़ी के साथ गंगा के अनेक घाटों पर श्रद्धालुओं का स्नान होगा। इस पर्व के दिन देवकर्म अधिक किए जाते हैं। जो श्रद्धालु पितृ कर्म करने आये हैं वे दो दिन बाद आ रही सोमवती अमावस्या की प्रतिक्षा करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें