अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मानव स्वास्थ्य सेवा संस्थान के बैनर तले जनाक्रोश रैली निकालते हुए घेराव के लिए पहुंचे आरएमपी चिकित्सा कर्मियों को जिलाधिकारी दीपक रावत की नाराजगी झेलनी पड़ी। डीएम ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा संबंधी डिग्री नहीं होने पर उन्हें चिकित्सा सेवाएं देने का काम नहीं करने दिया जाएगा। पिछले कुछ समय से जिला प्रशासन ने आरएमपी चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाया हुआ है। एक ही दिन में 45 दुकानों को सील कर दिया गया था।
मानव स्वास्थ्य सेवा संस्थान के बैनर तले पुल जटवाडा के पास एकत्रित होकर आरएमपी चिकित्सा कर्मियों ने जनाक्रोश रैली निकाली। उनकी मांग थी कि लंबे समय से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे इन कार्मिकों का प्रशासन उत्पीडन न करें। उन्होंने ऐसे कार्मिकों को केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2014 में प्रशिक्षण देने के लिए जारी की गई व्यवस्था पर अमल करने की मांग उठाई। बड़ी संख्या में चिकित्सा कर्मियों के एकत्र होने पर रोशनाबाद स्थित कलक्ट्रेट परिसर में भारी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। तय किया गया कि जिलाधिकारी से केवल पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल ही मिल सकेगा। इस पर यूनियन के संरक्षक वीरेंद्र कुमार शर्मा, अध्यक्ष घनश्याम सिंह, महासचिव अशोक कुमार समेत पांच प्रतिनिधि डीएम से मिलने पहुंचे। डीएम ने उन्हें सख्त हिदायत दी कि जब तक वे कोई आधिकारिक डिग्री अथवा कोर्स नहीं कर लेते उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं नहीं करने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समुचित ज्ञान नहीं होने से कई चिकित्सा कर्मी लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। कहा कि उनके गलत इलाज की वजह से किसी की मौत होने पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। चिकित्सा कर्मियों ने सरकार की ओर से कोई प्रशिक्षण दिलाने का आग्रह किया। इस संबंध में सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन भी डीएम को सौंपा। प्रदर्शनकारियों में रामगोपाल गुप्ता, यासीन अहमद, शमशाद, खुर्शीद अहमद, भूपेंद्र, जोगेंद्र, इलमचंद, अशोक पांडे, नौशाद अंसारी, अशोक चौहान, अजय सैनी और राशिद आदि शामिल रहे।