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19.34 करोड़ में होगा कूड़ा निस्तारण

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम की सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट परियोजना की 19.34 करोड़ रुपये की संशोधित डीपीआर पर शहरी विकास सचिव की मोहर लग चुकी है। तय समय पर परियोजना का काम पूरा नहीं होने से लागत बढ़ने से डीपीआर को संशोधित कराना पड़ा है।
जेएनएनयूआरएम में करीब 16.72 करोड़ की योजना को वर्ष 2015 तक कार्य पूरा होना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट के काम को सिरे चढ़ाने के लिए 2012 से कोशिश की जा रही है। इसके लिए अनुबंधित कंपनी केआरएल को कंपोस्ट प्लांट की स्थापना के लिए 10 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। प्लांट को चलाने के लिए अभी भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनापत्ति की जरूरत है। इसके बिना कंपोस्टिंग प्लांट नहीं चलाया जा सकता है। वर्ष 2012 से सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट परियोजना का एक भी काम नियमानुसार तथा वैज्ञानिक विधि से नहीं हो रहा है। शहर में अभी एरियावार कूड़ा डंपिंग यार्ड तक स्थापित नहीं किए जा सके हैं। नतीजन कूड़े कचरे के जगह-जगह लगे ढेर लगे रहते हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत केआरएल को जैविक तथा अजैविक कूड़े का एकत्रीकरण और पृथकीकरण कर वैज्ञानिक विधि उसका निस्तारण करना है, परंतु 2012 से अब तक शहर में इसके लिए अलग-अलग कूड़ेेदान तक नहीं हैं। जानलेवा मेडिकल वेस्ट भी उन्हीं कूड़ेदानों में डाला जा रहा है जिनमें घरेलू कूड़ा तथा झूठन डाली जाती है।
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अब स्थिति बदलने की उम्मीद
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना को सिरे चढ़वाने की कोशिश में नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने काफी तेजी से कसरत की है। वह 19.34 करोड़ रुपये की संशोधित डीपीआर पर शासन की मोहर लगवाने में सफल रहे हैं। उनका कहना था कि डीपीआर संशोधित होने के बाद कंपोस्ट प्लांट रनिंग में आ जाएगा। अब शहरवासी वैज्ञानिक विधि से कूड़ा निस्तारण की उम्मीद कर सकते हैं। सेनेटरी लैंडफिल का काम भी तभी शुरू हो पाएगा जब कंपोस्ट प्लांट नियमित रूप से काम करने लगेगा।
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सराय में बनकर तैयार खड़ा कंपोस्ट प्लांट को चालू करने के लिए शनिवार फिर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 1.35 लाख रुपये का शुल्क जमा करा दिया है। मानकों के अनुसार प्लांट चलाने के लिए पांच लाख रुपये बैंक गारंटी भी जमा करा दी गई है। 27 अप्रैल को सचिव शहरी विकास ने परियोजना की संशोधित 19.34 करोड़ की डीपीआर को स्वीकृति दे दी है। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए 5 करोड़ रुपये देने वाला है। अब जल्दी सुधार दिखाई देने लगेगा। - मनोज शर्मा, प्रबंधक केआरएल
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