ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर से विभिन्न आरोपों के चलते निष्कासित 31 में 27 छात्रों को कुलपति ने बहाल करते हुए निदेशक को प्रवेश लेने के आदेश जारी कर दिए है, हालांकि इनसे पूर्व दो छात्रों का प्रवेश 29 मार्च को करा दिया गया था, जबकि एक छात्र को पिछले सप्ताह प्रवेश देने के आदेश जारी किए। 24 छात्रों के प्रवेश को आदेश 15 मई को जारी किए गए। हालांकि प्रवेश देते समय इन सभी छात्रों से शपथपत्र लेकर ही कक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाएगी। कुलसचिव ने निदेशक को यह निर्देश जारी करते हुए कुलपति की ओर से जारी अनुमति होने की बात लिखित में जारी की है।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल परिसर से मुन्नाभाई हायर कर प्रवेश लेने के साथ अनुशासन में निष्कासित 31 छात्रों में पुलकित आर्य और दीदार सिंह का प्रवेश 29 मार्च को कुलपति के आदेश पर परिसर निदेशक ने कर लिया था। अब कुलपति के आदेश पर कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी ने अन्य 24 छात्रों के प्रवेश लेने को निदेशक को निर्देश जारी कर दिए हैं। कुलसचिव ने निदेशक को जारी पत्र में लिखा है कि बहाली का आदेश विश्वविद्यालय, शासन स्तर पर गतिमान जांच प्रक्रिया के अधीन रहेेगा। यदि भविष्य में जांच के उपरांत छात्रों के विरुद्घ कोई आरोप सिद्ध होता हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन उन छात्रों के खिलाफ नियमानुसार विधि सम्मत कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा। साथ ही संबंधित छात्रगण अपने परिसर में सदैव अनुशासन बनाए रखने में अपने शिक्षकों का अपेक्षित सहयोग करेंगे। प्रवेश लेने से पूर्व छात्रों से 100 रुपये के स्टांप पर लिखित शपथपत्र मांगा गया है। जिसके बाद ही परिसर निदेशक उन्हें कक्षाओं में बैठने दें। कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी ने निदेशक को पत्र जारी करते हुए बताया कि आदेश कुलपति की अनुमति के उपरांत ही जारी किया है। उन्होंने बताया कि आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के निर्देश पर शासन स्तर पर मामले की जांच की जाएगी।
ये है पूरा प्रकरण
उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट-2016 (यूएपीएमटी) की 7 अगस्त को हुई प्रवेश परीक्षा में ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर के 3 मुन्नाभाई पकड़े गए थे। जिनके खुलासे पर एसआईटी और एलआईयू की टीम के साथ चार प्रोफेसरों के द्वारा कराई छात्रों की जांच में कई के बीएएमएस के प्रवेश पत्रों से लेकर आवेदन फार्म पर भी लगे फोटो के साथ हस्ताक्षर भी मैच नहीं हो सके। जिस पर 27 छात्रों के मामले सामने आए। इनमें से कुछ के तो शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट व सनद पर लगे फोटो भी मैच नहीं कर पाए। जांच सत्र 2012 से 2016 के प्रवेश लिए गए छात्र-छात्राओं की जांच हुई। जिसमें 2013,14,15 बैच के 27 छात्रों के साथ 3 छात्र यूएपीएमटी में दूसरे की परीक्षा देने वाले और एक छात्र आतंकवाद के आरोप में पकड़े जाने सहित 31 छात्रों को परिसर के तत्कालीन निदेशक प्रो. एएन पांडेय ने 23 अगस्त को निष्कासित कर दिया था। निदेशक की तहरीर पर आरोपी छात्रों के खिलाफ नगर कोतवाली में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद धोखाधड़ी, कूट रचना जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। इनमें से 14 छात्र जेल भी गए। अन्य की गिरफ्तारी पुलिस की शिथिलता के चलते हुए नहीं हो सकी।
अभी इनका प्रवेश नहीं
मोहम्मद अकरम, सरवेज अली, मोहम्मद मेराज, राव गुड्डू शामिल है। इनमें मोहम्मद अकरम, सरवेज अली और राव गुड्डू देहरादून में दूसरों के स्थान पर प्रवेश परीक्षा देते हुए पकड़े गए थे। जबकि मोहम्मद मेराज आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्ता के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद है।
कुलपति की ओर से छात्रों का निष्कासन समाप्त किए जाने पर 27 छात्रों का प्रवेश दोबारा लिए जाने की प्रक्रिया जारी है। प्रवेश देने से पूर्व समस्त विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की जाएगी। दोबारा से प्रवेश पाए छात्र अपनी संबंधित कक्षाओं में अध्यापन करेंगे। जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी और दोष सिद्ध होने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
प्रो. सुनील जोशी, निदेशक, ऋषिकुल परिसर।