ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकनपत्र पर दो लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई। उन्होंने नामांकनपत्र में कुछ तथ्य छिपाने का आरोप लगाया था। आपत्तियों के बाद निर्वाचन अधिकारी ने दोनों प्रत्याशियों के पक्ष सुने साथ ही उनके तथ्य भी देखे। इसके बाद उन्होंने दोनों प्रत्याशियों के नामांकनपत्रों को सही पाया।
कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व विधायक अंबरीष कुमार के नामांकन पत्र पर विष्णु घाट निवासी प्रदीप कुमार ने कई तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हुए शपथ पत्र देकर जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की। उनका आरोप था कि अंबरीष कुमार ने आपराधिक मुकदमा और विधानसभा 2017 में नामांकनपत्र में वर्ष 2003 में फ्लैट खरीदना दर्शाया था, लेकिन इस नामांकनपत्र में इन तथ्यों को छिपाया है। इस पर पूर्व विधायक ने अपने तथ्य पेश कर बताया कि उन्होंने फ्लैट बेच दिया है, इसलिए नामांकनपत्र में उसे नहीं दर्शाया गया। साथ ही उनपर दर्ज मुकदमे को प्रशासन ने वापस ले लिया है। उनके प्रस्तुत तथ्यों से जिला निर्वाचन अधिकारी संतुष्ट हुए और नामांकनपत्र को सही पाया।
वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रत्याशी डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के नामांकनपत्र पर देहरादून निवासी मनीष वर्मा ने आपत्ति की। उनकी शिकायत थी कि पूर्व सीएम निशंक ने अपने आश्रित श्रेयाशी निशंक की आय व बैंक बैलेंस और विदुशी निशंक के बैंक खाते को नहीं दर्शाया। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री आवास की देनदारियों को छिपाया और दिल्ली सांसद निवास का स्थायी नो ड्यूज जमा न कर प्रोविजनल नो ड्यूज जमा किया है। साथ ही फार्म ए और बी भी अधूरा बताया। इस पर पक्ष रखते हुए डॉ. निशंक ने बताया कि श्रेयाशी निशंक आत्मनिर्भर है। इस कारण उसकी संपत्ति को नामांकनपत्र में नहीं दर्शाया गया है। इसके अलावा दिल्ली स्थित सांसद निवास का प्रोविजनल नो ड्यूज का कारण मौजूदा सांसद होना बताया। इन्हीं सभी तथ्यों को सही माने जाने पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने फार्म ए एवं बी को अधूरा होने को गंभीर नहीं माना। इस पर रमेश पोखरियाल निशंक के नामांकनपत्र को सही पाया। जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक रावत ने बताया कि दोनों नामांकन पत्रों पर शिकायत आने पर आवेदकों के पक्ष सुने गए और पक्ष से संतुष्ट होने पर नामांकनपत्र सही पाए गए।