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माता-पिता को प्रसन्न रखना ही सबसे बड़ी भक्ति: कौशल महाराज

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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मंगलमय परिवार की ओर से प्रेमनगर आश्रम में चल रहे श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुए कथा व्यास पूज्य संत विजय कौशल महाराज नेे श्रीराम की बाल लीलाओं से भक्तों को आत्मविभोर किया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पूजा अपने आचरण और वाणी से माता-पिता को प्रसन्न रखना ही सबसे बड़ी भक्ति है। इस दौरान पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कथा को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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सोमवार को कथा सुनाते हुए कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि जब पत्नी के सामने बेटा मां को आंखें दिखाए तो मां को उस समय प्रसव पीड़ा से भी ज्यादा पीड़ा होती है। उन्होंने कहा कि सच्चा आनंद वही है जहां देह का आभास शून्य हो जाए। भगवान के भजन के लिए इच्छाशक्ति चाहिए। घर को छोड़ कर भागने वाले को भगवान नहीं मिलते हैं, आश्रम मिल जाता है। उन्होंने कहा कि पैसा और पद के लिए शरीर को दौड़ाना पड़ता है और ईश्वर को पाने के लिए शरीर को बैठाना व मन को स्थिर करना पड़ता है। स्थान नहीं बदलना है तो स्थिति को बदलिए, सोचिए, मैं क्यों आया हूं, इस धरती पर आने पर मेरा क्या कर्तव्य है, मुझे क्या करना है इस पर चिंतन करिए। धर्म और धंधे अलग-अलग नहीं हैं। कथा व्यास ने कहा कि श्रीराम चाहते थे कि जगत का हर व्यक्ति उनके जैसा मर्यादित बने। वह अपने और दूसरों में कोई भेद नहीं रखते थे। कथा के शुभारंभ पर विधान सभा के अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि भगवान की कथाएं हमें साक्षात ईश्वर से जोड़ती हैं और सही मार्ग पर चलने को प्रेरित करती हैं। इस मौके पर बृजभूषण विद्यार्थी, विमल कुमार, वीरेंद्र तिवारी, बालकृष्ण शास्त्री, आशीष बंसल, प्रद्युम्न अग्रवाल, निशांत कौशिक, रमेश उपाध्याय, पवन गुप्ता, अशोक जान्हवी, प्रेम बल्लभ, सुषमा वंशल, विनीता मल्होत्रा, अंशु अरोड़ा, अलका राठौर, ललिता कुमार, शशि उपाध्याय, रेखा अग्रवाल, कुसुम गांधी, अश्विनी चौहान, संगीता गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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