रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
भाजपा के बहुमत वाले नगर निगम बोर्ड का पांच साल का कार्यकाल तीन मई को समाप्त हो रहा है। मेयर मनोज गर्ग की अध्यक्षता में पांच वर्षों में बोर्ड की 20 बैठकों में 500 से अधिक प्रस्ताव पास किए गए हैं, लेकिन अधिकांश प्रस्ताव रद्दी की ही टोकरी में गए।
प्रदेश में अधिकांश समय कांग्रेस की सरकार होने से बोर्ड सफाई और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था तक ही सीमित रहा। चार साल तक बोर्ड और नौकरशाही आमने-सामने रहने से विकास संबंधी प्रस्तावों को नीति संबंधी बताकर स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाता रहा, जो शासन से कभी वापस आए नहीं। स्थिति यह रही कि सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की कार्ययोजना तक का प्रस्ताव अधिकारियों ने क्रियान्वित नहीं किया। मेयर कार्यालय के बाहर दुकानों का निर्माण कराने, नगर निगम का नया कार्यालय भवन बनाने, यात्रा कर लगाने, चित्रा टाकीज के दुकानदारों को विस्थापित करने आदि महत्वाकांक्षी प्रस्तावों को फाइलों में बंद करके रख दिया गया। रोपवे कंपनी उषा ब्रेकों को करोड़ों का लाभ और नगर निगम का नुकसान भी अधिकारियों के कारण हुआ है। वर्ष 2013 से अरबों रुपये मूल्य की लीज संपत्तियों पर अवैध रूप से काबिज बड़े रसूखदारों से अधिकारी न किराया ले पाए और न किसी ने संपत्ति को खाली कराने में दिलचस्पी दिखाई ।
मेयर मनोज गर्ग ने इरादा जाहिर किया है कि वह बोर्ड की एक और बैठक कर उसमें पांच साल में पारित प्रस्तावों की समीक्षा करेंगे।
मेयर को मिलने चाहिए अधिकार
मेयर मनोज गर्ग ने बेहिचक स्वीकार किया कि जनता ने जो जिम्मेदारी दी थी उसके अनुसार काम करने की ईमानदार कोशिश की गई, लेकिन चार साल अधिकारियों ने कोई काम ही नहीं करने दिया। राज्य सरकार ने छोटी सरकार (नगर निगम बोर्ड) से कभी बात नहीं की। प्रदेश में सरकार किसी और दल की होने पर अधिकारी मेयर की सुनते ही नहीं हैं। उनकी मांग है कि 74 वां संविधान संशोधन की सिफारिशों को लागू कर मेयर को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलने चाहिए। अधिकारियों के तबादलों का अधिकार भी मेयर को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कुछ करने नहीं दिया। सरकार बदलने के बाद काम करने का अनुकूल माहौल बना है अधिकारी भी सुनने लगे हैं। अब अमृत मिशन में काम होने लगा है, अंदर ग्राउंड बिजली फिटिंग का काम शुरू होने वाला है और रसोई तक पाइप लाइन से गैस पहुंचाने का काम भी अब तेजी पर है। निगम में नया भवन निर्माण भी होने वाला है।