फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ण्ण्ण्सोमवती अमावस्या पर उमड़ा सैलाब, लाखों ने लगाई डुबकी

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
इस वर्ष पहली बड़ी भीड़ सोमवती अमावस्या के स्नान पर्व पर उमड़ी। लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। महिलाओं ने सुख-सौभाग्य के लिए अनेक प्रकार की सौभाग्य वस्तुओं का दान दिया। सूत के धागे लपेेटते हुए पीपल के वृक्षों की परिक्रमा के बाद अन्न जल ग्रहण किया।
सोमवार को सवेरे से ही सोमवती अमावस्या के पर्व स्नान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब अलसुबह से ही हरकी पैड़ी की उमड़ रहा था। करीब दस लाख स्नानार्थी गंगा के पवित्र स्नान के लिए धर्मनगरी पहुंचे। रविवार को ही अमावस्या लगने से तड़के तीन बजे से स्नान प्रांरभ हो गया था। अधिकांश स्नानार्थी सवेरे के समय गोते लगाना चाहते थे। कारण यह था कि अमावस्या तिथि सवेरे 7.22 बजे तक विद्यमान थी। अलबत्ता सूर्योदय के समय अमावस्या होने से पूरे दिन जमकर स्नान चला। कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच स्नानार्थियों को डुबकी लगाते ही हरकी पैडी क्षेत्र से बाहर जाने के लिए कहा गया। कहीं भीड़ का जमावड़ा गंगा के बीचोंबीच स्थित गंगा मंदिर में न हो जाए, इसके लिए मंदिर को तड़के तीन बजे से ही फट्टे लगाकर बंद कर दिया था। यह मंदिर सायंकालीन आरती के बाद खोला गया। हरकी पैड़ी पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया तथा अपने विश्राम स्थल पर जाकर बैसाख महात्म्य की कथा सुनीं। महिलाएं पीपल के वृक्षों पर पहुंची जहां सूत के धागे लपेटते हुए 108 परिक्रमाएं की गई। जिन महिलाओं के 13 सोमवती स्नान पूरे हो गए थे, उन्होंने गंगा के अनेक घाटों पर जाकर परिवार में सुख-समृद्धि की कामना को लेकर उद्यापन किया। उद्यापन के बाद महिलाओं ने पंड़ितों को जोड़ी भोज भी कराया। हरकी पैड़ी की भांति उत्तरी हरिद्वार के तमाम घाटों, कुशावर्त, रामघाट, हनुमान घाट, बिरला घाट, विष्णु घाट, राज घाट, दक्ष घाट, सीता घाट आदि पर भी स्नान हुआ। कुछ श्रद्धालुओं ने पितृ श्राद्ध कराए।
विज्ञापन

नए वर्ष में यद्यपि अनेक पर्व पड़े हैं। लेकिन लगातार चार दिनों से चले आ रहे पर्वों का समापन दिवस सर्वाधिक भीड़ लेकर आया। पंजाब, जम्मू-काश्मीर और दिल्ली से लाखों यात्री सोमवती नहाने पहुंचे। अन्य राज्यों से खासी भीड़ गंगा नगरी में आई।
विज्ञापन

बैसाख मास में चल रहे अनेक पाठों और कथाओं का समापन सोमवती अमावस्या के भंडारों के साथ हुआ। भारी भीड़ को देखते हुए कुछ नगरीय क्षेत्रों में एक मार्गीय पैदल यातायात व्यवस्था लागू की गई। शताब्दी पुल और शिव सेतु का प्रयोग भीड़ के अनुसार तात्कालिक नीति बनाकर किया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें