हरिद्वार। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि शासन-प्रशासन को 1952 के नोटिफिकेशन का पालन करना चाहिए। इसके तहत रायवाला से भोगपुर तक स्टोन क्रशर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
मंगलवार को मातृसदन में पत्रकार वार्ता में स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि तत्कालीन सिंचाई विभाग की ओर से रायवाला से भोगपुर तक के क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था। पूरे जिले में एक भी क्रशर मानक के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार स्टोन क्रशर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से प्रेसवार्ता मेें जो तथ्य बोले थे वह सभी गलत हैं। उन्होंने कहा कुंभ क्षेत्र की रक्षा करना प्रदेशवासियों का कर्तव्य है। वर्ष 2009 में गढ़वाल कमिश्नर उमाकांत पंवार ने सिंचाई विभाग, प्रभागीय वनाधिकारी से रिपोर्ट तैयार कराई थी कि पहाड़ों से बोल्डर पत्थर बहकर आते हैं। लेकिन न्यायालय ने उसे पूरी तरह खारिज कर दिया था। एक मामले में उन्हें हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने एक माह की ट्रेनिंग पर जाने के आदेश दिए थे। संतों की ओर से अग्रसैन घाट पर जल लाने की बात पर उन्होंने कहा कि समस्त घाटों पर जल लाने के लिए वह भी आवाज उठाते रहे हैं। लेकिन खनन के लिए जल लाने की बात का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि घाटों पर जल लाने की आवाज उठाने वाले बच्चे हैं, उनमें ज्ञान और धर्म का अभाव है। कहा कि वर्ष 2010 में प्रदेश सरकार ने गुपचुप ढंग से मातृसदन को कुंभ क्षेत्र से बाहर कर दिया था। अब खुलेआम मातृसदन को कुंभ क्षेत्र से बाहर करने की बात कही जा रही है। उधर, कुंभ मेला क्षेत्र के विस्तार की मांग को लेकर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद सरस्वती की तपस्या मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही।