हरिद्वार। जहरीली शराब कांड ने धर्मनगरी हरिद्वार में चल रहे अवैध शराब के अवैध धंधे की तरफ सभी का ध्यान खींचा है। विश्व प्रसिद्ध हरकी पैड़ी से लेकर शहर के हर गली कूचे में कैसे शराब पहुंचती है और कैसे बिकती है, यह पूरा गठजोड़ बेहद दिलचस्प है। शराब कारोबारी, तस्कर, पुलिस, आबकारी से लेकर खद्दरधारी इस धंधे की गहरी जड़े हैं, ये ही पूरे नेटवर्क का मिलजुल कर संचालन करते हैं।
नगर निगम बॉयलाज के अनुसार शहर से दूर ही शराब के सरकारी ठेके खोले जा सकते हैं। यहां मद्यनिषेध क्षेत्र है। यात्री बाहुल्य शहर होने के कारण यहां शराब की भारी डिमांड रहती है। एक वक्त था, जब हरियाणा से अंग्रेजी शराब की सप्लाई बड़े पैमाने पर होती थी लेकिन अब वह सिस्टम नहीं रहा। हरकी पैड़ी से लेकर शहर की मलिन बस्तियों में देसी शराब की बड़े स्तर पर खपत होती है। दरअसल, देसी शराब सरकारी ठेकों से आती है। ठेकेदारों ही अपने कर्मचारियों के माध्यम से तस्कर तक शराब पहुंचाता है। शराब ठेकेदारों को रोजाना के कोटे को ठिकाने भी लगाना है लिहाजा उनकी मजबूरी है कि, वे डिलीवरी दें। सूत्रों के अनुसार ठेकेदार ही उस क्षेत्र की पुलिस को साधते हैं, जहां से उनका आदमी शराब लेकर गुजरता है। यदि पुलिस ने पकड़ लिया तो उनका नुकसान होगा ही, साथ साथ अपने कर्मचारी की जमानत लेने से लेकर तमाम कानूनी खर्च का भार पड़ता है। पुलिस के साथ साथ आबकारी विभाग के संरक्षण के भी आरोप समय समय पर लगते रहे हैं। राजनीतिक संरक्षण में भी शराब का गोरखधंधा फलफूल रहा है। एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि सभी थानाध्यक्षों को अवैध शराब की तस्करी करने वालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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भिखारियों के लिए विक्रम की निशुल्क सुविधा
हरिद्वार। चंडीघाट चौक पर तो दो विक्रम रोजाना भिखारियों को ढोने के लिए निशुल्क खड़े होते हैं। यह विक्रम सीधे श्यामपुर क्षेत्र में पहुंचते हैं। भिखारी यहां ठेके से शराब खरीदते हैं और कई बार बेचने के लिए भी लाते हैं। यही भिखारी हरकी पैड़ी से लेकर अन्य गंगा घाटों पर शराब बेचते हैं। विक्रम की यह व्यवस्था एक दशक से भी अधिक समय से चली आ रही है।