हरिद्वार, रुड़की देहात के छह गांवों को ताउम्र सालने वाला दर्द दे चुकी जहरीली शराब की खेप आखिर कहां से आई थी, ये बड़ा सवाल अभी भी जस का तस है। यूपी उत्तराखंड के जिम्मेदार अफसर से लेकर सरकारें एक दूसरे के पाले में गेंद खिसकाने में जुटी है लेकिन इतना जरूर तय है कि सीमावर्ती क्षेत्र के इन प्रमुख चार संपर्क मार्गों का इस्तेमाल सीधे सीधे मौत बांटने में जरूर हुआ है।
अब तक यह साफ नहीं हो सका कि आखिर जहरीली शराब कहां से आई थी। किसने यह शराब बनाई थी और किसने यह बेची है। एक साथ इतने ग्रामीण आखिर क्यों शराब खरीद लाए थे, इसके पीछे की आखिर क्या वजह है। इस सवाल का जवाब ढूंढने की बजाय यूपी और उत्तराखंड के अधिकारी हटो बचो के फार्मूले पर कार्य कर रहे हैं लेकिन जहां जहां जहरीली शराब ने कई जिंदगियां लील ली हैं, उसके आस पास के संपर्क मार्ग सीधे यूपी को जोड़ते हैं। क्षेत्र के अस्सेवाला से महेश्वरी होते हुए बिंडुखड़क, खेड़ा विलासपुर से बिंडुखड़क, यूपी के माल्ली गांव से सीमा को पार करते हुए बिंडूखड़क-भलस्वागाज और गढोला से तेज्जुपुर संपर्क मार्ग हैं। ग्रामीणों की मानें तो इन्हीं रास्तों का प्रयोग करते हुए माफिया अपनी शराब की खेप हरिद्वार जिले में पहुंचाते हैं। राजमार्गों पर पुलिस और आबकारी विभाग के बैरियर लगे होने के कारण उन पर तलाशी के दौरान पकड़े जाने का खतरा बना रहता है। इसलिए वे इन संपर्क मार्गों को प्रयोग करते हैं। इन संपर्क मार्गों पर सिस्टम कभी मुस्तैद नहीं रहता है जबकि क्षेत्र के कई गांव कच्ची शराब बनाने के अड्डे बने हैं।