ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्रों ने अपनी मांगों के लिए एक घंटे तक मौन रहकर विवि प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। विवि के छात्र शिक्षकों की कमी को दूर करने सहित विभिन्न मांगों के लिए आंदोलित है। छात्रसंघ ने मांगे पूरी न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
छात्रसंघ अध्यक्ष लोकेंद्र प्रसाद कुकरेती के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को छात्र शिक्षण भवन के गेट पर पहुंचे। यहां पर छात्रों ने अपनी मांगों के लिए घंटेभर तक मौन बैठकर विवि प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। छात्रसंघ अध्यक्ष लोकेन्द्र प्रसाद कुकरेती ने कहा कि विवि में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, छात्रावास की व्यवस्था, छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, पीएचडी के छात्रों की फीस कम करने, खेल मैदान आदि मांगों के लिए विवि के कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित और कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी को कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है। लेकिन विवि प्रशासन छात्रों की मांग पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। यदि जल्द छात्रों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो छात्र आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे। छात्रसंघ के सचिव शुभम यदुवंशी ने कहा कि विवि में शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है। बीलिब, एमलिब आदि पाठ्यक्रमों में तो एक भी शिक्षक नहीं है, जिसके चलते छात्रों का भविष्य अधर में है। कहा कि छात्र जब भी अपनी मांगों के संबंध में विवि प्रशासन से मिलने के लिए जाते हैं, तो उन्हें मिलने तक नहीं दिया जाता। सह सचिव महेश सुंडा ने कहा कि अगर हमारी मांगों को अनसुना किया जाता रहा तो छात्र विश्वविद्यालय में आमरण अनशन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। इस अवसर पर मोहित, अभिनव, नवीन, दीपांशु, सौरभ, संजीव, विकास, वेद प्रकाश, सुधीर, विवेक जोशी आदि छात्र मौजूद रहे।