हरिद्वार। गंगा सभा की बुधवार को होने वाली बैठक पर सोसायटी रजिस्ट्रार ने रोक लगा दी है। उठाई गई आपत्तियों का जवाब न दिए जाने पर रजिस्ट्रार ने 15 दिनों के भीतर सभापति और महामंत्री से जवाब मांगा है। विपक्षी पुरोहितों की ओर से लगाए गए आरोपों का भी कोई जवाब न देने पर रजिस्ट्रार ने नाराजगी प्रकट की है।
गौरतलब है कि प्रधानसभा के 782 सदस्यों के बजाय महती सभा के हजारों पुरोहितों को मताधिकार देने के लिए गंगा सभा के अध्यक्ष के कड़े विरोध के बावजूद महामंत्री ने 11 जुलाई को मालवीय धाम में न केवल प्रधानसभा बल्कि आम पुरोहितों की भी बैठक आहूत की थी। इस बैठक का विरोध पूर्व सभापति ओमप्रकाश शर्मा, पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी और वर्तमान अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन देकर किया था। इनका कहना था कि महामना मालवीय द्वारा स्थापित 102 वर्ष पुरानी संस्था गंगा सभा के संविधान में परिवर्तन करने के लिए समिति बनाई जानी चाहिए। यह समिति सदस्यों से सुझाव आमंत्रित करे। उसी समय रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद सभापति कृष्ण कुमार शर्मा और महामंत्री रामकुमार मिश्रा को रजिस्ट्रार ने संविधान संशोधन के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाने का आदेश दिया था। इस कमेटी में विपक्ष के दो सदस्य रखे जाने अनिवार्य थे। महामंत्री ने रजिस्ट्रार के आदेश को दरकिनार कर 11 जुलाई को प्रधानसभा और महती सभा की संयुक्त बैठक बुला डाली। इसका विरोध गत दिवस फिर से गंगा सभा अध्यक्ष गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा, अशोक त्रिपाठी, ओम प्रकाश शर्मा आदि ने किया। उन्होंने अपने खेमे की ओर से मनोज कौशिक और अखिलेश शास्त्री के नाम भी रजिस्ट्रार को सौंप दिए। रजिस्ट्रार द्वारा पुन: महामंत्री से जवाब मांगा गया, लेकिन रामकुमार मिश्रा ने जवाब देने से इन्कार कर दिय।
इस पर फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स उप निबंधक राजेश कुमार सिंह ने मंगलवार को कड़ा पत्र सभापति और महामंत्री को दिया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से बुधवार की बैठक पर रोक लगा लगा दी। उपनिबंधक ने कहा कि कार्यालय में अनेक शिकायती पत्र बैठक को लेकर प्राप्त हो रहे हैं। बार-बार मांगने पर भी सभापति और महामंत्री कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। जब वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा भी बैठक को गलत ठहरा रहे हों, तब बैठक का आयोजन पूर्ण: अवैध है। सभापति और महामंत्री को पत्र हस्तगत करा कर उपनिबंधक ने इस लापरवाही पर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है, ताकि आपत्तियों का निस्तारण नियमानुसार किया जा सके। संविधान संशोधन का निर्णय तभी कानून सम्मत होगा जब बैठक से पूर्व कमेटी का गठन कर दिया जाए। फिलहाल बैठक पर रोक लगा दी गई है।
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गंगा सभा के महामंत्री जबरन वयस्क मताधिकार लागू कराना चाहते हैं। जब तक बाकायदा एक कमेटी बनाकर सदस्यों से सुझाव न मांग लिए जाएं, तब बैठक नहीं बुलाई जा सकती। यह संस्था सभी पुरोहितों के लिए है। संविधान में परिवर्तन किया जा सकता है, बशर्ते कि वह नियमानुसार हो। आश्चर्य की बात है कि महामंत्री रामकुमार मिश्रा तानाशाही पूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। गंगा सभा एक पंजीकृत संस्था है और संविधान संशोधन सभासदों की राय से ही किया जा सकता है। रजिस्ट्रार के आदेश का हजारों पुरोहित स्वागत करते हैं।
- अशोक त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष गंगा सभा, नेता विपक्ष
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गंगा सभा सभी वयस्कों को मताधिकार देने की मांग पर अडिग है। सभा रजिस्ट्रार से बंधी है, इसिलए बैठक स्थगित की जा रही है। इस संबंध में शीघ्र ही नया निर्णय लिया जाएगा।
रामकुमार मिश्रा, महामंत्री गंगा सभा