अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
हरिद्वार धर्मनगरी में इस समय चारों ओर बम बम और हर-हर महादेव के स्वर सुनाई पड़ रहे हैं। मुख्य हरिद्वार नगरी पर कांवड़ियों का पूरा कब्जा हो गया है। इस समय धर्मनगरी आस्था के बोलों से सजी है। देश के विभिन्न भागों से कांवड़ियों का आगमन लगातार जारी है।
जिन क्षेत्रों में कांवड़ियों का बोलबाला है वे अधिकांश हरकी पैड़ी से सटे क्षेत्र हैं। खास भीड़ रोड़ी बेलवाला के मैदान में हैं जहां देर शाम तक ही नही अपितु रात के अंधेरे में भी कांवड़ भरी जा रही हैं। आने वाले कांवड़िए अब मालवीय द्वीप पर कांवड़ उठाने से पहले पूजन भी करा रहे हैं। हर-हर महादेव और बम बम का जयघोष करते कांवड़िए कांवड़ भरने के साथ ही वापस लौट रहे है। हरिद्वार के आश्रमों व धर्मशालाओं में कांवड़ियों का पड़ाव केवल एकदिन के लिए होता है। हरकी पैड़ी से सटे बड़े बाजार, मोती बाजार, अपर रोड़, सब्जी मंडी, घाट रोड़, रामघाट, विष्णु घाट और रेलवे रोड़ तक कांवडियों की भीड़ अब अपार होने लगी है। इसी तरह भीमगौड़ा क्षेत्र में भी भीड़ बढ़ी है। अभी भी अधिकांश कांवड़िए गंगा पार के रास्ते चंडी घाट होते हुए वापस लौट रहे है। हरिद्वार-रुड़की मार्ग पर वापसी प्रारंभ हो चुकी है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश व दिल्ली जाने वाले कांवड़िए इसी मार्ग से गुजरते हैं। फागुन मास के कांवड़ मेले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बंद नही किया जाता। कुछ कांवड़ियों ने इसके बावजूद नहर पटरी मार्ग से वापसी शुरू कर दी है।
सावन मेले की भांति इस कांवड मेले में भी कांवड बनाने का बाजार उपनगरी ज्वालापुर से ही चल रहा है। बनी-बनाई कांवडे़ं हरिद्वार के बाजार में बिकने आती हैं। कांवड़ का मुख्य बाजार अपर रोड़ से रेलवे रोड तक लगा हुआ है। चूंकि फागुन के कांवड मेले में कम भीड़ आती है, अत: इस मेले में मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर आदि जनपदों से कांवड़ बनाने वाले मुस्लिम कारीगर नहीं आते। कांवड़ मेले में अब दो दिन बाद डाक कांवड़ियो का आगमन भी होने लगेगा।