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नमामि गंगे का कोई अर्थ नहीं, यदि नहर है हर की पैडी

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों की ओर से बार-बार किए गए प्रयासों के बावजूद प्रदेश सरकार ने हरकी पैडी से होकर बह रही गंगा को नहर बताने का शासनादेश निरस्त नहीं किया है। ऐसे में नाराज तीर्थ पुरोहित शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को साथ लेकर मुख्यमंत्री आवास जा पहुंचे। उन्होंने समूचे धर्म पर कुठाराघात करने वाला पिछली सरकार का शासनादेश तत्काल रद्द न करने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
गौरतलब है कि हरीश रावत सरकार ने गंगा के 200 मीटर में निर्माण पर उच्चतम न्यायालय की ओर से लगाई गई रोक से भूमाफियाओं को लाभ देने के लिए हरिद्वार में होकर बह रही गंगा को शासनादेश जारी कर नहर बता दिया था। पिछले वर्ष फरवरी-मार्च में विदा होने से ठीक पहले हरीश रावत सरकार ने यह शासनादेश जारी कर भूमाफियाओं को गंगा किनारे निर्माण की खुली छूट दे दी। तब से इस शासनादेश का लगातार विरोध चल रहा है। इसके बावजूद सरकार ने शासनादेश वापस नहीं लिया। इस मुद्दे पर जब नगरवासियों एवं पुरोहित समाज ने शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को घेरा तब वे पुरोहितों को अपने साथ मुख्यमंत्री आवास ले गए। पुरोहितों के प्रतिनिधिमंडल में गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी, पूर्व महामंत्री विरेंद्र श्रीकुंज, पूर्व सभापति ओमप्रकाश शर्मा, सुरेंद्र मारवाडी, आचार्य करुणेश मिश्र, सभासद शशिकांत वशिष्ठ, अंबरीश पंडा, रामकुमार गौतम, विजय वर्मा, सुशील चौधरी, नंद किशोर सरैये, राकेश चाकलान, ओमप्रकाश सैनी, गोपाल गोस्वामी, विनय श्रोत्रिय आदि शामिल थे। मुख्यमंत्री को चार पृष्ठों का ज्ञापन और अनेक दस्तावेज सौंपकर चार युगों से बह रही गंगा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। पुरोहितों ने अनेक शासनादेश, ब्रिटिश सरकार द्वारा लिए गए निर्णय, न्यायालयों के फैसले आदि मुख्यमंत्री को सौंपे। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने साफ कहा है कि हरकी पैडी से गंगा बह रही है, नहर नहीं।
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शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह शासनादेश पिछली सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की ओर से गलत ढंग से जारी किया गया। आंदोलनकर्ता सुरेंद्र मारवाडी और अशोक त्रिपाठी ने बताया कि गंगा और नहरों पर उत्तर प्रदेश का अधिकार है। जब उत्तर प्रदेश बार-बार उत्तराखंड के शासनादेश को हास्यास्पद बता रहा है, तब उत्तराखंड सरकार को तत्काल इसे निरस्त करना चाहिए।
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