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बांध बनने से गुजरात में 80 किमी अंदर आया समुद्र : मेधा

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर का कहना है कि नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध बनने के बाद समुद्र 80 किमी तक अंदर प्रवेश कर गया है। समुद्र के पानी से भूजल और जमीन खारी हो गई। इसका सीधा असर कृषि, मछुआरों और उद्योगों पर पड़ा है। उन्होंने केंद्र और गुजरात सरकार पर सरदार पटेल की प्रतिमा लगाने के नाम पर आदिवासियों की भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि नदियों को बचाने के लिए भक्तिभाव को प्रकृतिभाव और श्रद्धा में परिवर्तित करना होगा।
शनिवार को मातृसदन में गंगा की रक्षा के लिए आयोजित सम्मेलन में पहुंचीं मेधा पाटकर ने नदियों पर बनाई जा रही योजनाओं के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गुजरात में बांध बनाने से नदियों का बहाव रुक गया और समुद्र 80 किमी अंदर तक प्रवेश कर गया है। नर्मदा पर इसका असर देखने को मिल रहा है। बाढ़ आना खत्म हो गई है और जो पहले डूब क्षेत्र थे वहां सूख पड़ रहा है। गुजरात में हाल ही में बनाई गई सरदार पटेल की प्रतिमा पर उन्होंने कहा कि सरकार ने आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर लिया। शोभा के तौर पर सरदार पटेल की प्रतिमा के लोकार्पण पर नदी में पानी छोड़ा गया, लेकिन यह लोगों को नजर नहीं आता। इस पर राजनीति की जा रही है।
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उन्होंने गुजरात में शराब पर प्रतिबंध होने के बाद भी वहां शराब पहुंच रही है। महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में होटल बन गए हैं। सरदार सरोवर बांध से कच्छ और खेती को नहीं बल्कि उद्योगों को पानी दिया जा रहा है। यह बांध मानवनिर्मित और प्राकृतिक नहीं बल्कि शासकीय है। उन्होंने कहा कि आज विकास के नाम पर देश में जो विनाश हो रहा है, उसे जनता के सामने लाना जरूरी है। गंगा पर जल मार्ग से न केवल नाविक उजड़ेंगे बल्कि नदी भी उजड़ेगी। योजनाओं के नाम पर नर्मदा परिक्रमा को खंडित कर दिया गया। आज स्थिति यह है कि आदिवासी अपने पाड़े (क्षेत्र) पर नहीं पहुंच पा रहे हैं और न ही बच्चे अपने जीवनशाला (स्कूल) जा पा रहे हैं।
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